History of Medieval India
सल्तनत, मुग़लों और क्षेत्रीय राज्यों पर सबसे भरोसेमंद एक-खंडीय पुस्तक।
दिल्ली से पाँच राजवंश एक के बाद एक शासन करते हैं, जबकि अनेक क्षेत्रीय राज्य और सल्तनतें फलती-फूलती हैं।
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| नाम | प्रकार | अवधि | क्षेत्र | राजधानी |
|---|---|---|---|---|
| नेपाल का मल्ल वंश ★ | राज्य | 1201 – 1769 | हिमालय | काठमांडू, पाटन, भक्तपुर |
| दिल्ली सल्तनत ★ | सल्तनत | 1206 – 1526 | उत्तर | दिल्ली |
| अहोम राज्य ★ | राज्य | 1228 – 1826 | पूर्वोत्तर | चराइदेउ, बाद में गढ़गाँव / रंगपुर |
| मेवाड़ (सिसोदिया) ★ | राज्य | 1326 – 1949 | पश्चिम | चित्तौड़गढ़, बाद में उदयपुर |
| कालीकट के ज़मोरिन | राज्य | लगभग 1124 – 1766 | दक्षिण | कोझिकोड |
| जाफ़ना राज्य | राज्य | लगभग 1215 – 1619 | श्रीलंका | नल्लूर |
| मारवाड़ (राठौड़) | राज्य | लगभग 1226 – 1949 | पश्चिम | मंडोर, बाद में जोधपुर |
| मदुरै सल्तनत | सल्तनत | 1335 – 1378 | दक्षिण | मदुरै |
| कश्मीर सल्तनत | सल्तनत | 1339 – 1586 | उत्तर | श्रीनगर |
| सम्मा वंश | राजवंश | 1351 – 1524 | उत्तर-पश्चिम | ठट्टा |
| बंगाल सल्तनत | सल्तनत | 1352 – 1576 | पूर्व | पांडुआ / गौड़ |
| तैमूरी साम्राज्य (हेरात) | साम्राज्य | 1370 – 1507 | उत्तर-पश्चिम | समरक़ंद, बाद में हेरात |
| मालवा सल्तनत | सल्तनत | 1392 – 1562 | मध्य भारत | मांडू |
| जौनपुर (शर्की) सल्तनत | सल्तनत | 1394 – 1479 | गंगा का मैदान | जौनपुर |
| गुजरात सल्तनत | सल्तनत | 1407 – 1573 | पश्चिम | अहमदाबाद |
| कोट्टे राज्य | राज्य | 1412 – 1597 | श्रीलंका | श्री जयवर्धनपुर कोट्टे |
| गजपति राज्य | राज्य | 1434 – 1541 | पूर्व | कटक |
| चुटिया राज्य | राज्य | लगभग 1187 – 1524 | पूर्वोत्तर | सदिया |
| दंबदेनिया राज्य | राज्य | लगभग 1220 – 1345 | श्रीलंका | दंबदेनिया / यापहुवा |
| रेड्डी राज्य | राज्य | 1325 – 1448 | दक्कन | कोंडवीडु / राजमुंदरी |
| गम्पोला राज्य | राज्य | 1341 – 1412 | श्रीलंका | गंपोला |
| ख़ानदेश सल्तनत (फ़ारूक़ी) | सल्तनत | 1382 – 1601 | दक्कन | बुरहानपुर |
| त्रिपुरा (माणिक्य) | राज्य | लगभग 1400 – 1949 | पूर्वोत्तर | उदयपुर, बाद में अगरतला |
| वर्ष | घटना | राज्य |
|---|---|---|
| 1206 | दिल्ली सल्तनत की स्थापना | मामलुक (ग़ुलाम) वंश |
| 1211 | इल्तुतमिश सुल्तान बना | मामलुक (ग़ुलाम) वंश |
| 1221 | चंगेज़ ख़ान ने जलालुद्दीन का सिंधु तक पीछा किया जलालुद्दीन सिंधु पार भाग निकला और इल्तुतमिश ने उसे शरण देने से इनकार किया। |
|
| 1228 | सुकाफ़ा ने अहोम राज्य की स्थापना की | अहोम राज्य |
| 1229 | इल्तुतमिश को ख़लीफ़ा से मान्यता-पत्र मिला | मामलुक (ग़ुलाम) वंश |
| 1236 | रज़िया सुल्तान सिंहासन पर बैठी | मामलुक (ग़ुलाम) वंश |
| 1240 | रज़िया सुल्तान पदच्युत और मारी गई सत्ता 'चालीसा' कहलाने वाले तुर्क अमीरों के हाथ गई। |
मामलुक (ग़ुलाम) वंश |
| लगभग 1250 | कोणार्क सूर्य मंदिर का निर्माण | पूर्वी गंग वंश |
| 1266 | बलबन सुल्तान बना | मामलुक (ग़ुलाम) वंश |
| 1279 | चोल वंश का अंत पांड्य प्रमुख तमिल शक्ति बन गए। |
चोल साम्राज्य |
| 1290 | ख़िलजी क्रांति | ख़िलजी वंश |
| 1292 | मार्को पोलो की पांड्य तट यात्रा | पांड्य साम्राज्य (द्वितीय साम्राज्य) |
| 1296 | अलाउद्दीन ख़िलजी का देवगिरि पर आक्रमण | ख़िलजी वंश |
| 1296 | अलाउद्दीन ख़िलजी सुल्तान बना | ख़िलजी वंश |
| 1299 | कीली में मंगोल पराजित अलाउद्दीन ख़िलजी की सेना ने क़ुतलुग़ ख़्वाजा का मंगोल आक्रमण विफल किया। |
ख़िलजी वंश |
| 1301 | अलाउद्दीन ख़िलजी ने रणथंभौर जीता हम्मीरदेव चौहान मारा गया। |
ख़िलजी वंश |
| 1303 | चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी लंबी घेराबंदी के बाद चित्तौड़ अलाउद्दीन ख़िलजी के हाथ आ गया। |
ख़िलजी वंश |
| 1310 | मलिक काफ़ूर ने वारंगल जीता काकतीय शासक प्रतापरुद्र दिल्ली का करद बन गया। |
ख़िलजी वंश |
| 1311 | मलिक काफ़ूर का दक्षिणी अभियान मदुरै पहुँचा पांड्य राजधानी लूटी गई और उसका ख़ज़ाना दिल्ली ले जाया गया। |
ख़िलजी वंश |
| 1316 | अलाउद्दीन ख़िलजी की मृत्यु मलिक काफ़ूर ने कुछ समय सत्ता हथियाई; चार वर्ष बाद ख़िलजियों का पतन हुआ। |
ख़िलजी वंश |
| 1320 | ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने तुग़लक़ वंश की स्थापना की | तुग़लक़ वंश |
| 1323 | काकतीयों का पतन वारंगल मिला लिया गया और काकतीय वंश समाप्त हुआ। |
तुग़लक़ वंश |
| 1327 | राजधानी दौलताबाद स्थानांतरित इससे भारी कष्ट हुआ और कुछ वर्षों में निर्णय पलट दिया गया। |
तुग़लक़ वंश |
| लगभग 1329 | मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने सांकेतिक मुद्रा चलाई व्यापक जालसाज़ी के कारण सिक्के वापस लेने पड़े। |
तुग़लक़ वंश |
| 1334 | इब्न बतूता दिल्ली पहुँचा | तुग़लक़ वंश |
| 1336 | विजयनगर की स्थापना | संगम वंश |
| 1343 | इब्न बतूता मालदीव में क़ाज़ी रहा | मालदीव सल्तनत |
| 1347 | बहमनी सल्तनत की स्थापना | बहमनी सल्तनत |
| 1351 | फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ सुल्तान बना | तुग़लक़ वंश |
| 1352 | इलियास शाह ने बंगाल को एकीकृत किया | बंगाल सल्तनत |
| 1378 | विजयनगर ने मदुरै सल्तनत को मिलाया कुमार कंपण के अभियान से मदुरै सल्तनत का अंत हुआ। |
संगम वंश |
| 1382 | नेपाल में जयस्थिति मल्ल के सुधार | नेपाल का मल्ल वंश |
| 1398 | तैमूर ने दिल्ली लूटी दिल्ली तबाह हो गई और तुग़लक़ सल्तनत फिर कभी नहीं सँभली। |
तुग़लक़ वंश |
| 1407 | गुजरात सल्तनत स्वतंत्र हुई | गुजरात सल्तनत |
| 1411 | अहमदाबाद की स्थापना | गुजरात सल्तनत |
| 1412 | पराक्रमबाहु षष्ठ ने कोट्टे से श्रीलंका को एकीकृत किया | कोट्टे राज्य |
| 1414 | ख़िज़्र ख़ान ने सैयद वंश की स्थापना की | सैयद वंश |
| 1420 | निकोलो दे कोंटी की विजयनगर यात्रा | संगम वंश |
| 1443 | अब्दुर रज़्ज़ाक़ का विजयनगर दूतावास | संगम वंश |
| लगभग 1450 | वाराणसी में कबीर की कविता | |
| लगभग 1450 | बागेरहाट की साठ गुंबद मस्जिद | बंगाल सल्तनत |
| 1451 | बहलोल लोदी ने लोदी वंश की स्थापना की | लोदी वंश |
| 1459 | राव जोधा ने जोधपुर बसाया मेहरानगढ़ क़िला राठौड़ों की राजधानी बना। |
मारवाड़ (राठौड़) |
| 1469 | गुरु नानक का जन्म | |
| लगभग 1469 | कैंडी राज्य का उदय | कैंडी राज्य |
| 1482 | नेपाल घाटी तीन मल्ल राज्यों में बँटी | नेपाल का मल्ल वंश |
| 1490 | बीजापुर और अहमदनगर बहमनियों से अलग हुए | बीजापुर सल्तनत (आदिल शाही) |
| 1498 | वास्को द गामा कालीकट पहुँचा यूरोप से भारत का सीधा समुद्री मार्ग खुल गया। |
कालीकट के ज़मोरिन |
| 1504 | सिकंदर लोदी ने आगरा बसाया आगरा लोदियों और बाद में मुग़लों की राजधानी बना। |
लोदी वंश |
| 1505 | पुर्तगाली श्रीलंका पहुँचे | कोट्टे राज्य |
| 1509 | कृष्णदेवराय का राज्यारोहण | तुलुव वंश |
| 1509 | दीव का युद्ध अरब सागर में पुर्तगाली नौसैनिक वर्चस्व स्थापित हुआ। |
पुर्तगाली भारत (एस्तादो दा इंडिया) |
| 1510 | पुर्तगालियों ने गोवा जीता गोवा 1961 तक पुर्तगाली 'एस्तादो दा इंडिया' की राजधानी बना रहा। |
पुर्तगाली भारत (एस्तादो दा इंडिया) |
| 1520 | कृष्णदेवराय ने रायचूर जीता विजयनगर ने बीजापुर से रायचूर दोआब जीत लिया। |
तुलुव वंश |
| 1526 | पानीपत का पहला युद्ध इब्राहीम लोदी मारा गया और बाबर ने मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की। |
मुग़ल साम्राज्य |
सल्तनत, मुग़लों और क्षेत्रीय राज्यों पर सबसे भरोसेमंद एक-खंडीय पुस्तक।
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