साहित्य

वेद और उपनिषद, महाकाव्य, संगम कविताएँ, भक्ति-काव्य और यात्रियों की पुस्तकें।

  1. लगभग 1500–1000 ई.पू.🏺 प्राचीन

    ऋग्वेद

    देवताओं — विशेषकर अग्नि, इंद्र और सोम — की स्तुति में सूक्त, लगभग 1500 से 1000 ई.पू. के बीच संकलित।

  2. लगभग छठी सदी ई.पू. से🏺 प्राचीन

    उपनिषद

    इनमें जीवन के अर्थ और मृत्यु के बाद जीवन की संभावना पर प्रश्न मिलते हैं; छांदोग्य उपनिषद लगभग छठी सदी ई.पू. में संस्कृत में रचा गया।

  3. लगभग 500 ई.पू. से🏺 प्राचीन

    महाभारत

    1,00,000 से अधिक श्लोकों का विशाल महाकाव्य, जो लगभग 1,000 वर्षों में रचा गया।

  4. बुद्ध के बाद🏺 प्राचीन

    त्रिपिटक

    बुद्ध की शिक्षाएँ त्रिपिटक — ‘तीन टोकरियाँ’ — के रूप में संकलित हुईं, पहले मौखिक रूप से, फिर लिखित; विनय पिटक में संघ के नियम थे।

  5. मौर्य काल🏺 प्राचीन

    मेगस्थनीज़ और अर्थशास्त्र

    मौर्य इतिहास मेगस्थनीज़ के विवरण (जो अंशों में बचा है) और अर्थशास्त्र पर आधारित है, जिसके कुछ भाग संभवतः कौटिल्य या चाणक्य ने रचे।

  6. लगभग पहली सदी ई.🏺 प्राचीन

    तमिल संगम कविताएँ

    पुरनानूरु जैसे संकलन सरदारों और उनके चारणों का वर्णन करते हैं और सामाजिक-आर्थिक जीवन पर प्रकाश डालते हैं।

  7. लगभग चौथी सदी ई.🏺 प्राचीन

    प्रयाग प्रशस्ति

    इसे इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख भी कहते हैं; इसे समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने संस्कृत में रचा — राजा की प्रशंसा में लिखी एक प्रशस्ति।

  8. आलवार परंपरा🏰 मध्यकालीन

    ‘तमिल वेद’ और आंडाल

    आलवारों का संकलन नालायिर दिव्यप्रबंधम् ‘तमिल वेद’ कहलाया; आलवार संत आंडाल के गीत आज भी गाए जाते हैं।

  9. ग्यारहवीं सदी🏰 मध्यकालीन

    अल-बिरूनी की किताब-उल-हिंद

    973 में ख़्वारिज़्म में जन्मे अल-बिरूनी सीरियाई, अरबी, फ़ारसी, हिब्रू और संस्कृत जानते थे, और उन्होंने भारत पर विस्तृत पुस्तक लिखी।

  10. बारहवीं सदी🏰 मध्यकालीन

    बसवन्ना और लिंगायत

    बसवन्ना के अनुयायी — वीरशैव या लिंगायत — आज भी इस क्षेत्र का एक महत्त्वपूर्ण समुदाय हैं; उनके वचन खोखले कर्मकांड पर प्रश्न उठाते हैं।

  11. लगभग 14वीं–15वीं सदी🏰 मध्यकालीन

    कबीर की वाणी

    कबीर की वाणी तीन परंपराओं में बची है: कबीरपंथ का बीजक, दादूपंथ की ग्रंथावली, और आदि ग्रंथ साहिब।

  12. सूफ़ी परंपरा🏰 मध्यकालीन

    पद्मावत

    मलिक मुहम्मद जायसी का प्रेमाख्यान, चित्तौड़ की पद्मिनी और रतनसेन की कथा, जिनकी परीक्षाएँ आत्मा की यात्रा का प्रतीक हैं।

  13. 1598🏰 मध्यकालीन

    आइन-ए-अकबरी

    अकबर का साम्राज्य कैसे चलता था, इसका अबुल फ़ज़्ल का विवरण पाँच संशोधनों के बाद 1598 में पूरा हुआ।

  14. 18वीं सदी का अंत🏭 आधुनिक

    एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल

    विलियम जोन्स और उनके सहयोगियों ने संस्कृत और फ़ारसी ग्रंथों के अध्ययन और अनुवाद के लिए एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल और पत्रिका एशियाटिक रिसर्चेज़ शुरू की।

  15. 1919 से🏭 आधुनिक

    महाभारत का समालोचनात्मक संस्करण

    1919 से वी. एस. सुकथंकर के नेतृत्व में विद्वानों ने देश भर की पांडुलिपियों की तुलना की; परियोजना 47 वर्ष चली और 13,000 से अधिक पृष्ठों की बनी।

हम कैसे जाँचते हैं: हर प्रविष्टि उस NCERT अध्याय के किसी अंश से लिखी गई है जिससे वह जुड़ी है, और जब तक उस अंश के मुख्य वाक्यांश अध्याय के अपने पाठ में न मिलें, हमारा बिल्ड विफल होता है। तिथियाँ केवल वहीं दी गई हैं जहाँ अध्याय उन्हें देता है।