पर्यावरण और भूमि

नहरें और झीलें, वन, झूम खेती और औपनिवेशिक वन-क़ानून।

  1. हड़प्पा सभ्यता🏺 प्राचीन

    शोर्तुगई की नहरें

    हड़प्पा के कई स्थल अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में हैं जहाँ सिंचाई की ज़रूरत रही होगी; अफ़ग़ानिस्तान के शोर्तुगई में नहरों के निशान मिले हैं, पर पंजाब या सिंध में नहीं।

  2. लगभग दूसरी सदी ई.🏺 प्राचीन

    सुदर्शन झील का अभिलेख

    एक संस्कृत शिलालेख बताता है कि आँधी से तटबंध टूटने पर शक शासक रुद्रदामन ने मौर्यकालीन झील की मरम्मत करवाई — प्रजा पर कर लगाए बिना। उसी शिला पर बाद का एक गुप्त अभिलेख फिर से मरम्मत का उल्लेख करता है।

  3. 15वीं सदी का आरंभ🏰 मध्यकालीन

    कमलापुरम तालाब और हिरिया नहर

    विजयनगर में वर्षा का जल संग्रहित करके नगर तक पहुँचाया जाता था: कमलापुरम तालाब खेतों को सींचता और राजकीय केंद्र तक पानी पहुँचाता था, और हिरिया नहर प्रमुख जल-संरचनाओं में थी।

  4. मुग़ल काल🏰 मध्यकालीन

    जंगल और खरबंदी

    गहन खेती वाले उत्तर के बाहर, पूर्वी, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के विशाल भूभाग घने वन (जंगल) या झाड़ीदार भूमि (खरबंदी) से ढके थे।

  5. 1832 तक🏭 आधुनिक

    दामिन-इ-कोह: कुदाल और हल

    अंग्रेज़ों ने दामिन-इ-कोह को संथालों की भूमि घोषित किया, जिन्होंने हल की खेती के लिए वन साफ़ किए; कुदाल से झूम खेती करने वाले पहाड़िया राजमहल की पहाड़ियों में और भीतर चले गए।

  6. उन्नीसवीं सदी🏭 आधुनिक

    झूम खेती

    कई आदिवासी समुदाय वनों के छोटे टुकड़ों पर झूम (स्थानांतरी) खेती करते थे — पेड़ों के ऊपरी भाग काटकर और वनस्पति जलाकर ज़मीन साफ़ करते हुए।

  7. औपनिवेशिक काल🏭 आधुनिक

    आरक्षित वन

    अंग्रेज़ों ने वनों को राज्य की संपत्ति घोषित किया; आरक्षित वनों में लोग न स्वतंत्र रूप से आ-जा सकते थे, न झूम खेती, फल-संग्रह या शिकार कर सकते थे।

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