कला और स्थापत्य शैलियाँ

शैलचित्र, मौर्य पॉलिश, गांधार और मथुरा, मंदिर-शैलियाँ, कांस्य प्रतिमाएँ और इंडो-इस्लामी स्थापत्य।

  1. प्रागैतिहासिक🏺 प्राचीन

    भीमबेटका के चित्रित शैलाश्रय

    भोपाल के पास लगभग 800 शैलाश्रय, जिनमें से 500 पर चित्र हैं — 1957–58 में पुरातत्वविद् वी. एस. वाकणकर ने खोजे।

  2. लगभग 2500 ई.पू.🏺 प्राचीन

    ‘नर्तकी’ और लुप्त-मोम ढलाई

    लुप्त-मोम ढलाई की विधि सिंधु घाटी में ज्ञात थी; मोहनजोदड़ो की ‘नर्तकी’ शायद सबसे पुरानी कांस्य प्रतिमा है।

  3. मौर्य काल🏺 प्राचीन

    सारनाथ का सिंह-शीर्ष

    मौर्य मूर्तिकला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण — और भारत का राष्ट्रीय प्रतीक। मौर्य प्रतिमाएँ अपनी चमकदार पॉलिश के लिए भी जानी जाती हैं, जैसे दीदारगंज की यक्षी।

  4. पहली सदी ई.पू. – पाँचवीं सदी ई.🏺 प्राचीन

    अजंता के चित्र

    अजंता पहली सदी ई.पू. से पाँचवीं सदी ई. तक की चित्रकला का एकमात्र बचा हुआ उदाहरण है।

  5. पहली सदी ई. से🏺 प्राचीन

    गांधार और मथुरा

    गांधार, मथुरा और वेंगी कला के प्रमुख केंद्र बने, और पहले प्रतीकों से दिखाए जाने वाले बुद्ध को मथुरा और गांधार में मानव रूप मिला।

  6. मंदिर-युग🏰 मध्यकालीन

    नागर, द्रविड़ — और वेसर

    मंदिर दो प्रमुख शैलियों में बने: उत्तर में नागर और दक्षिण में द्रविड़; कुछ विद्वान दोनों के मेल से बनी वेसर शैली का भी उल्लेख करते हैं।

  7. लगभग 750 ई. के बाद🏰 मध्यकालीन

    कैलाशनाथ मंदिर, एलोरा

    लगभग 750 ई. तक दक्कन पर अधिकार करने वाले राष्ट्रकूटों की स्थापत्य की सबसे बड़ी उपलब्धि।

  8. इंडो-इस्लामी काल🏰 मध्यकालीन

    मेहराब और गुंबद

    मेहराबी निर्माण-पद्धति आई, जिसमें आपस में जुड़े पत्थरों (वूस्वार) के मेहराब गुंबदों का भार उठा सकते थे; दीवारें पच्चीकारी, मोज़ेक, सुलेख और जालियों से सजाई गईं।

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