अर्थव्यवस्था और व्यापार
Weights and guilds, sea trade, silver, revenue systems and cash crops.
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हड़प्पा सभ्यता🏺 प्राचीन
चर्ट के बाट
लेन-देन सटीक बाटों से नियंत्रित होता था — आम तौर पर चर्ट नामक पत्थर के घन, बिना किसी निशान के।
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हड़प्पा सभ्यता🏺 प्राचीन
शोर्तुगई की नहरें
हड़प्पा के कई स्थल अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में हैं जहाँ सिंचाई की ज़रूरत रही होगी; अफ़ग़ानिस्तान के शोर्तुगई में नहरों के निशान मिले हैं, पर पंजाब या सिंध में नहीं।
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लगभग 600–500 ई.पू.🏺 प्राचीन
आहत सिक्के
सबसे आरंभिक सिक्कों का नाम इस बात से पड़ा कि धातु की सतह पर चिह्न ठोककर या ठप्पे से अंकित किए जाते थे।
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आरंभिक ऐतिहासिक काल🏺 प्राचीन
श्रेणियाँ
शिल्पकारों और व्यापारियों की श्रेणियाँ संभवतः कच्चा माल जुटाती, उत्पादन नियंत्रित करतीं और तैयार माल बेचती थीं।
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आरंभिक सदियाँ ई.🏺 प्राचीन
दक्षिण भारत में रोमन सिक्के
दक्षिण भारत में मिले रोमन सिक्कों के ढेर बताते हैं कि व्यापार-तंत्र राजनीतिक सीमाओं से बहुत आगे तक फैले थे।
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लगभग पहली सदी ई.🏺 प्राचीन
पेरिप्लस और मालाबार तट
एक अज्ञात यूनानी नाविक का विवरण मालाबार तट के बाज़ार-नगरों में व्यापार करने आए बड़े विदेशी जहाज़ों का वर्णन करता है।
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संगम युग🏺 प्राचीन
भूस्वामी, हलवाहे और दास
संगम ग्रंथ गाँवों के अलग-अलग वर्गों का उल्लेख करते हैं — बड़े भूस्वामी (वेल्लालर), हलवाहे (उलवर) और दास (अडिमै)।
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चौदहवीं सदी🏰 मध्यकालीन
सल्तनत की डाक-व्यवस्था
इब्न बतूता चकित था कि सिंध से दिल्ली की पचास दिन की यात्रा की तुलना में जासूसों की ख़बरें सुल्तान तक कहीं तेज़ पहुँचती थीं, और व्यापारी डाक से सूचना, ऋण और माल भेजते थे।
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अकबर का शासनकाल🏰 मध्यकालीन
अकबर का चाँदी का रुपया
NCERT अकबर का एक चाँदी का रुपया दिखाता है; बढ़ते व्यापार से एशिया में भारी मात्रा में चाँदी आई, और उसका बड़ा हिस्सा भारत पहुँचा।
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मुग़ल काल🏰 मध्यकालीन
रैयत, किसान और ज़मींदार
मुग़ल काल के हिंद-फ़ारसी स्रोत किसान को प्रायः रैयत कहते थे; आइन-ए-अकबरी बताती है कि राज्य खेती और राजस्व-वसूली कैसे संगठित करता था।
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1793🏭 आधुनिक
स्थायी बंदोबस्त
कंपनी ने तय किया कि बंगाल के हर ज़मींदार को कितना राजस्व देना है; जो न चुका पाते, उनकी ज़मींदारियाँ नीलाम कर दी जाती थीं।
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18वीं सदी के अंत से🏭 आधुनिक
कंपनी के लिए नक़दी फ़सलें
अंग्रेज़ों ने किसानों पर नील और अफ़ीम, और बाद में बंगाल में जूट, असम में चाय, संयुक्त प्रांत में गन्ना, पंजाब में गेहूँ और महाराष्ट्र व पंजाब में कपास उगाने का दबाव डाला।
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1822🏭 आधुनिक
महालवाड़ी बंदोबस्त
होल्ट मैकेंज़ी की बनाई इस व्यवस्था में राजस्व गाँव-गाँव (महाल) के हिसाब से तय होता, समय-समय पर संशोधित होता और मुखिया वसूलता था।
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उन्नीसवीं सदी🏭 आधुनिक
रैयतवाड़ी बंदोबस्त
बंबई दक्कन में, बंगाल के विपरीत, राजस्व सीधे रैयत (किसान) से तय किया गया।
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1859🏭 आधुनिक
परिसीमा क़ानून
साहूकारों और रैयतों के बीच ऋण-पत्रों की वैधता केवल तीन वर्ष कर दी गई, ताकि ब्याज का बोझ न बढ़े — पर साहूकारों ने इसके रास्ते निकाल लिए।
हम कैसे जाँचते हैं: हर प्रविष्टि उस NCERT अध्याय के किसी अंश से लिखी गई है जिससे वह जुड़ी है, और जब तक उस अंश के मुख्य वाक्यांश अध्याय के अपने पाठ में न मिलें, हमारा बिल्ड विफल होता है। तिथियाँ केवल वहीं दी गई हैं जहाँ अध्याय उन्हें देता है।