अर्थव्यवस्था और व्यापार

Weights and guilds, sea trade, silver, revenue systems and cash crops.

  1. 1793🏭 आधुनिक

    स्थायी बंदोबस्त

    कंपनी ने तय किया कि बंगाल के हर ज़मींदार को कितना राजस्व देना है; जो न चुका पाते, उनकी ज़मींदारियाँ नीलाम कर दी जाती थीं।

  2. 18वीं सदी के अंत से🏭 आधुनिक

    कंपनी के लिए नक़दी फ़सलें

    अंग्रेज़ों ने किसानों पर नील और अफ़ीम, और बाद में बंगाल में जूट, असम में चाय, संयुक्त प्रांत में गन्ना, पंजाब में गेहूँ और महाराष्ट्र व पंजाब में कपास उगाने का दबाव डाला।

  3. 1822🏭 आधुनिक

    महालवाड़ी बंदोबस्त

    होल्ट मैकेंज़ी की बनाई इस व्यवस्था में राजस्व गाँव-गाँव (महाल) के हिसाब से तय होता, समय-समय पर संशोधित होता और मुखिया वसूलता था।

  4. उन्नीसवीं सदी🏭 आधुनिक

    रैयतवाड़ी बंदोबस्त

    बंबई दक्कन में, बंगाल के विपरीत, राजस्व सीधे रैयत (किसान) से तय किया गया।

  5. 1859🏭 आधुनिक

    परिसीमा क़ानून

    साहूकारों और रैयतों के बीच ऋण-पत्रों की वैधता केवल तीन वर्ष कर दी गई, ताकि ब्याज का बोझ न बढ़े — पर साहूकारों ने इसके रास्ते निकाल लिए।

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