समाज
नातेदारी और जाति, ग्राम-जीवन, स्त्रियों की आवाज़ें और सुधार आंदोलन।
-
लगभग 1000 ई.पू. से🏺 प्राचीन
गोत्र के नियम
हर गोत्र का नाम किसी वैदिक ऋषि पर था; स्त्रियों से पति का गोत्र अपनाने की अपेक्षा थी, और एक ही गोत्र के लोग विवाह नहीं कर सकते थे।
-
लगभग 500 ई.पू. से🏺 प्राचीन
महाभारत
1,00,000 से अधिक श्लोकों का विशाल महाकाव्य, जो लगभग 1,000 वर्षों में रचा गया।
-
लगभग 500 ई.पू. – 200 ई.🏺 प्राचीन
धर्मसूत्र और मनुस्मृति
लगभग 500 ई.पू. से सामाजिक मानदंड धर्मसूत्रों और धर्मशास्त्रों में संकलित हुए; इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण मनुस्मृति लगभग 200 ई.पू. से 200 ई. के बीच संकलित हुई। वास्तविक सामाजिक संबंध संभवतः अधिक जटिल थे।
-
आरंभिक ऐतिहासिक काल🏺 प्राचीन
श्रेणियाँ
शिल्पकारों और व्यापारियों की श्रेणियाँ संभवतः कच्चा माल जुटाती, उत्पादन नियंत्रित करतीं और तैयार माल बेचती थीं।
-
अशोक का शासनकाल🏺 प्राचीन
धम्म महामात्र
अशोक ने धम्म का संदेश फैलाने के लिए विशेष अधिकारी — धम्म महामात्र — नियुक्त किए।
-
लगभग पहली सदी ई.🏺 प्राचीन
तमिल संगम कविताएँ
पुरनानूरु जैसे संकलन सरदारों और उनके चारणों का वर्णन करते हैं और सामाजिक-आर्थिक जीवन पर प्रकाश डालते हैं।
-
संगम युग🏺 प्राचीन
भूस्वामी, हलवाहे और दास
संगम ग्रंथ गाँवों के अलग-अलग वर्गों का उल्लेख करते हैं — बड़े भूस्वामी (वेल्लालर), हलवाहे (उलवर) और दास (अडिमै)।
-
आलवार परंपरा🏰 मध्यकालीन
‘तमिल वेद’ और आंडाल
आलवारों का संकलन नालायिर दिव्यप्रबंधम् ‘तमिल वेद’ कहलाया; आलवार संत आंडाल के गीत आज भी गाए जाते हैं।
-
बारहवीं सदी🏰 मध्यकालीन
बसवन्ना और लिंगायत
बसवन्ना के अनुयायी — वीरशैव या लिंगायत — आज भी इस क्षेत्र का एक महत्त्वपूर्ण समुदाय हैं; उनके वचन खोखले कर्मकांड पर प्रश्न उठाते हैं।
-
मुग़ल काल🏰 मध्यकालीन
रैयत, किसान और ज़मींदार
मुग़ल काल के हिंद-फ़ारसी स्रोत किसान को प्रायः रैयत कहते थे; आइन-ए-अकबरी बताती है कि राज्य खेती और राजस्व-वसूली कैसे संगठित करता था।
-
1829🏭 आधुनिक
सती प्रथा पर प्रतिबंध
राममोहन राय के अभियान के बाद — जिसमें उन्होंने प्राचीन ग्रंथों का हवाला दिया — 1829 में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगा।
-
1832 तक🏭 आधुनिक
दामिन-इ-कोह: कुदाल और हल
अंग्रेज़ों ने दामिन-इ-कोह को संथालों की भूमि घोषित किया, जिन्होंने हल की खेती के लिए वन साफ़ किए; कुदाल से झूम खेती करने वाले पहाड़िया राजमहल की पहाड़ियों में और भीतर चले गए।
-
1835 और 1854🏭 आधुनिक
अंग्रेज़ी शिक्षा अधिनियम और वुड का डिस्पैच
1835 के अधिनियम ने अंग्रेज़ी को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाया; 1854 के वुड के डिस्पैच ने यूरोपीय ज्ञान पर ज़ोर देने वाली शिक्षा-नीति तय की।
-
उन्नीसवीं सदी🏭 आधुनिक
झूम खेती
कई आदिवासी समुदाय वनों के छोटे टुकड़ों पर झूम (स्थानांतरी) खेती करते थे — पेड़ों के ऊपरी भाग काटकर और वनस्पति जलाकर ज़मीन साफ़ करते हुए।
-
1856🏭 आधुनिक
विधवा पुनर्विवाह वैध
विद्यासागर का सुझाव माना गया, और 1856 के एक क़ानून ने विधवा पुनर्विवाह की अनुमति दी।
-
19वीं सदी का उत्तरार्ध🏭 आधुनिक
लड़कियों के विद्यालय
उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में पंजाब में आर्य समाज और महाराष्ट्र में ज्योतिराव फुले ने लड़कियों के विद्यालय खोले।
-
1930 का दशक🏭 आधुनिक
राष्ट्र के लिए हिंदुस्तानी?
1930 के दशक तक कांग्रेस ने हिंदुस्तानी — हिंदी और उर्दू का मेल — को राष्ट्रभाषा मान लिया था, और गांधी ऐसी भाषा चाहते थे जिसे आम लोग समझ सकें।
हम कैसे जाँचते हैं: हर प्रविष्टि उस NCERT अध्याय के किसी अंश से लिखी गई है जिससे वह जुड़ी है, और जब तक उस अंश के मुख्य वाक्यांश अध्याय के अपने पाठ में न मिलें, हमारा बिल्ड विफल होता है। तिथियाँ केवल वहीं दी गई हैं जहाँ अध्याय उन्हें देता है।