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भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी

प्रमुख घटनाएँ

लगभग 15 लाख वर्ष पहलेअत्तिरमपक्कम के पत्थर के हस्त-कुठार
लगभग 3,85,000–1,72,000 वर्ष पहलेछोटे, अधिक परिष्कृत पत्थर के औज़ार
लगभग 7000 ई.पू. सेमेहरगढ़ में खेती का आरंभ
7,500–9,000 वर्ष पहलेसबसे पुरानी दंत-चिकित्सा
नवपाषाण कालआरंभिक कपास
आरंभिक हड़प्पाजुता हुआ खेत और मिट्टी के हल
हड़प्पा कालताँबा और काँसा धातुकर्म
हड़प्पा सभ्यताहड़प्पा लिपि
हड़प्पा सभ्यतानियोजित जल-निकास
हड़प्पा कालमानक अनुपात की ईंटें
लगभग 2500 ई.पू.लुप्त-मोम विधि से काँसे की ढलाई
हड़प्पा सभ्यतामानक बाट
हड़प्पा कालकठोर पत्थर के मनकों में छेद
हड़प्पा कालपैमाने और लंबाई की इकाइयाँ
हड़प्पा सभ्यतापहिया: मिट्टी की गाड़ियाँ
हड़प्पा काललोथल का गोदीबाड़ा
लगभग 3000–1500 ई.पू.धोलावीरा का जल-प्रबंधन
1800–1000 ई.पू.गंगा के मैदान में लोहे का काम
वैदिक कालवेदों में संख्या-नाम और भिन्न
लगभग 800 ई.पू. (बौधायन)शुल्बसूत्र: रस्सी से ज्यामिति
लगभग 600–500 ई.पू.धान की रोपाई
लगभग 500 ई.पू.पाणिनि की अष्टाध्यायी
मौर्य कालतक्षशिला, शिक्षा का केंद्र
तीसरी सदी ई.पू.ब्राह्मी: अशोक के अभिलेख
प्राचीन और मध्यकालवुट्ज़ इस्पात
दूसरी शताब्दी ई.पू. – तीसरी शताब्दी ई.छाया-घड़ी और जल-घड़ी
लगभग 100 ई.; गुप्त काल में अंतिम रूपचरक और सुश्रुत संहिता
करिकाल का शासनकालकल्लणै (ग्रैंड एनीकट)
लगभग दूसरी शताब्दी ई.सुदर्शन झील, एक जलाशय
तीसरी या चौथी सदी ई. तक पुरानाशून्य: बख्शाली पांडुलिपि
तीसरी सदी ई.पू. – तेरहवीं सदी ई.नालंदा महाविहार
प्राचीन कालजंग-रोधी लौह स्तंभ
लगभग 500 ई.आर्यभट और आर्यभटीय
499 ई.आर्यभट और दस अंकों से गणना
आर्यभट का समयघटिका-यंत्र (डूबते कटोरे की जल-घड़ी)
गुप्त कालवराहमिहिर की बृहत्संहिता
लगभग 530 ई.छड़ी की छाया से समय
जन्म 598 ई.ब्रह्मगुप्त: शून्य के नियम
6वीं–10वीं शताब्दीभास्कर प्रथम और त्रिकोणमिति
628 ई.ब्रह्मगुप्त के भिन्न-नियम
लगभग 700 ई.विरहांक संख्याएँ
8वीं शताब्दी का अंतविक्रमशिला विश्वविद्यालय
9वीं शताब्दीभारतीय अंक अरब जगत पहुँचे
लगभग 825 ई.अल-ख़्वारिज़्मी और ‘हिंदू अंक’
लगभग 850 ई.महावीराचार्य का गणितसारसंग्रह
10वीं शताब्दीचौंतीसा यंत्र — जादुई वर्ग
लगभग 10वीं शताब्दी ई.सुरपाल का वृक्षायुर्वेद
11वीं शताब्दीअल-बिरूनी ने भारतीय विज्ञान का अध्ययन किया
ग्यारहवीं सदीबावड़ियाँ: रानी की वाव
जन्म 1114भास्कराचार्य की लीलावती
भास्कर द्वितीय का समयजल-पात्रों में आकाश-दर्शन
लगभग 1200भारतीय अंक यूरोप पहुँचे
13वीं–17वीं शताब्दीआसवन से शुद्ध जस्ता
14वीं शताब्दीनारायण पंडित की गणितकौमुदी
14वीं शताब्दीमाधव और केरल स्कूल
1500नीलकंठ सोमयाजी का ग्रह-मॉडल
सितंबर 1556पहला छापाखाना
1727जयपुर, एक नियोजित नगर
अठारहवीं सदी का आरंभजंतर मंतर वेधशाला
1780भारत का पहला मुद्रित समाचार-पत्र
16 अप्रैल 1853पहली यात्री रेलगाड़ी
1875भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना
1879बिजली की रोशनी का आगमन
1881दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे
1895जे.सी. बोस ने बेतार संचरण दिखाया
1897पहली व्यावसायिक बिजली: सिद्रापोंग
1901पी.सी. राय ने भारत की पहली दवा कंपनी स्थापित की
27 मई 1909भारतीय विज्ञान संस्थान की स्थापना
16 फ़रवरी 1912जमशेदपुर का इस्पात
1921–1935आर.एच. दस्तूर का प्रकाश-संश्लेषण अध्ययन
16 जुलाई 1929इंपीरियल काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च की स्थापना
1930रेडियो प्रसारण की शुरुआत
1930सी.वी. रमन को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार
1931भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना
1940 के दशक का अंतभारत के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत
3 अगस्त 1954परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना
4 अगस्त 1956अप्सरा, एशिया का पहला अनुसंधान रिएक्टर
21 मार्च 1956भारतीय राष्ट्रीय पंचांग
1957डीज़ल इंजन: WDM-1
1 मार्च 1958परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना
10 जुलाई 1960CIRUS अनुसंधान रिएक्टर
1954–1960टिफ़्रैक: भारत का पहला चालू कंप्यूटर
1962INCOSPAR: भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान की शुरुआत
1960 और 1970 के दशकहरित क्रांति
1968हरगोबिंद खुराना को नोबेल पुरस्कार
15 अगस्त 1969इसरो का गठन
28 अक्टूबर 1969तारापुर: भारत का पहला परमाणु बिजलीघर
1960 और 1970 के दशकश्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ़्लड)
1971तेल-रिसाव तोड़ने वाला जीवाणु
मई 1974भारत का पहला परमाणु परीक्षण
19 अप्रैल 1975आर्यभट, भारत का पहला उपग्रह
7 जून 1979भास्कर-I: पहला भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह
18 जुलाई 1980SLV-3 ने रोहिणी को कक्षा में पहुँचाया
19 जून 1981APPLE, पहला भारतीय संचार उपग्रह
1983सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर को नोबेल पुरस्कार
30 अगस्त 1983इनसैट-1B
अक्टूबर 1985फ़ास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर क्रांतिक हुआ
1988सी-डैक और PARAM सुपरकंप्यूटर
मई 1998पोखरण में परमाणु परीक्षण
2002पोषण विज्ञान पर आधारित मध्याह्न भोजन कार्यक्रम
5 मई 2005कार्टोसैट-1: त्रिविम मानचित्र
22 अक्टूबर 2008चंद्रयान-1
1 जुलाई 2013IRNSS-1A: भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली की शुरुआत
5 नवंबर 2013मंगल कक्षित्र मिशन
28 सितंबर 2015एस्ट्रोसैट, भारत की अंतरिक्ष वेधशाला
25 अगस्त 2016यूपीआई: तुरंत डिजिटल भुगतान
22 जुलाई 2019चंद्रयान-2
2019वंदे भारत ट्रेनें
दिसंबर 2022हानले डार्क स्काई रिज़र्व
2 सितंबर 2023आदित्य-L1 सूर्य का अध्ययन
23 अगस्त 2023चंद्रयान-3 चंद्रमा पर उतरा

वैज्ञानिक और विद्वान

पाणिनि की अष्टाध्यायीपाणिनि की अष्टाध्यायी, संस्कृत व्याकरण का ग्रंथ।
चरक और सुश्रुत संहितासंस्कृत में चिकित्सा के ग्रंथ। आयुर्वेद की जड़ें कहीं पुरानी हैं, पर ये ग्रंथ — जिनमें रोगों का वर्गीकरण और निदान भी है — गुप्त काल में संकलित होकर अंतिम रूप में आए।
आर्यभट और आर्यभटीयगणित और खगोल का एक छोटा ग्रंथ। आर्यभट ने कहा कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, वर्ष की लंबाई आधुनिक मान से कुछ ही मिनट के अंतर पर बताई, पृथ्वी के आकार का अनुमान लगाया और सूर्य व चंद्र ग्रहण की सही व्याख्या की। पृथ्वी के एक घूर्णन का उनका मान लगभग 23 घंटे 56 मिनट 4.1 सेकंड है।
आर्यभट और दस अंकों से गणनाआर्यभट पहले गणितज्ञ थे जिन्होंने दस प्रतीकों की भारतीय पद्धति को पूरी तरह समझाया और उससे विस्तृत वैज्ञानिक गणनाएँ कीं; उन्होंने एक अज्ञात वाले प्रश्न हल करने की व्यवस्थित विधि भी पहली बार दी।
घटिका-यंत्र (डूबते कटोरे की जल-घड़ी)बहते पानी वाली घड़ियाँ पानी घटने पर धीमी हो जाती थीं, इसलिए डूबते कटोरे की जल-घड़ी बनी — जिसका पहला उल्लेख आर्यभट ने किया। इससे विहारों, महलों और चौराहों पर समय रखा जाता था और हर बार कटोरा डूबने की घोषणा होती थी; दिन को 60 घटियों में बाँटा गया।
वराहमिहिर की बृहत्संहिताएक विश्वकोशीय ग्रंथ जिसमें खगोल और ज्योतिष, मौसम का पूर्वानुमान, वास्तु, नगर नियोजन और खेती तक शामिल हैं।
छड़ी की छाया से समयवराहमिहिर ने एक खड़ी छड़ी की छाया से समय निकालने का सटीक सूत्र दिया।
ब्रह्मगुप्त: शून्य के नियमब्रह्मस्फुटसिद्धांत में उन्होंने शून्य, ऋणात्मक संख्याओं और भिन्नों के साथ अंकगणित के नियम दिए। उनकी रचनाएँ बाद में फ़ारसी और लैटिन में अनूदित हुईं।
ब्रह्मगुप्त के भिन्न-नियमब्रह्मस्फुटसिद्धांत ने भिन्नों को जोड़ने, घटाने, गुणा और भाग करने की विधि पहली बार सामान्य रूप में बताई — वही विधियाँ आज भी पढ़ाई जाती हैं। ये विचार अरबों के माध्यम से यूरोप पहुँचे।
अल-बिरूनी ने भारतीय विज्ञान का अध्ययन कियाअल-बिरूनी ने संस्कृत सीखी और भारत का विश्वकोशीय सर्वेक्षण लिखा; गणित और खगोल में उन्होंने आर्यभट, वराहमिहिर और ब्रह्मगुप्त की रचनाओं से जो मिला, उसे संकलित किया।
भास्कराचार्य की लीलावतीभारत के महानतम गणितज्ञों और खगोलविदों में से एक: लीलावती (1150 ई.) पहेलियों से गणित सिखाती है, बीजगणित उन्नत बीजगणित पर है और सिद्धांतशिरोमणि खगोलीय गणना पर। उनकी कई रचनाएँ मुग़ल काल में फ़ारसी में अनूदित हुईं।
जे.सी. बोस ने बेतार संचरण दिखायाजगदीश चंद्र बोस ने मिलीमीटर-तरंगों से बेतार संचरण की पहल की; कलकत्ता में एक प्रयोग में उन्होंने दिखाया कि संकेत दीवार के पार जा सकते हैं।
पी.सी. राय ने भारत की पहली दवा कंपनी स्थापित की‘आधुनिक भारतीय रसायन के जनक’ प्रफुल्ल चंद्र राय ने बंगाल केमिकल्स एंड फ़ार्मास्युटिकल्स की स्थापना की — ब्रिटिश एकाधिकार तोड़ने के स्वदेशी प्रयास का हिस्सा। उन्होंने भारत में रसायन के इतिहास पर भी लिखा।
सी.वी. रमन को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार“प्रकाश के प्रकीर्णन पर कार्य और उनके नाम पर रखे गए प्रभाव की खोज के लिए” — रमन प्रभाव।
भारत के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआतहोमी जे. भाभा के मार्गदर्शन में, शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा बनाने हेतु शुरू हुआ।
भारतीय राष्ट्रीय पंचांगमेघनाद साहा की अध्यक्षता वाली पंचांग सुधार समिति ने एकीकृत राष्ट्रीय पंचांग की सिफ़ारिश की, जो 1 चैत्र 1878 शक से अपनाया गया; यह सूर्य सिद्धांत के सामान्य सिद्धांतों का पालन करता है।
INCOSPAR: भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान की शुरुआतविक्रम साराभाई की परिकल्पना के अनुसार भारत सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति बनाई।

आगे क्या

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वर्ष YugMap के अभिलेखों से हैं; c. वाली तिथियाँ अनुमानित हैं। yugmap.com से मुद्रित।