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संवैधानिक इतिहास (1773–1950)

1773 – 1950

प्रमुख घटनाएँ

1773रेग्युलेटिंग एक्ट
1798सहायक संधि
1813–1823सर्वोच्चता की नीति
1848–1856व्यपगत का सिद्धांत
1854वुड का घोषणापत्र
18581858 का अधिनियम: ताज का शासन
1861भारतीय परिषद अधिनियम, 1861
1878शस्त्र अधिनियम और देशी भाषा प्रेस अधिनियम
1883इल्बर्ट बिल विवाद
दिसंबर 1885भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना
1892भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
1905बंगाल विभाजन
1907कांग्रेस में विभाजन
1909भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 (मॉर्ले-मिंटो)
1916लखनऊ समझौता
1919रॉलेट एक्ट
1919भारत शासन अधिनियम, 1919 (मॉन्टेग्यू-चेम्सफ़ोर्ड)
दिसंबर 1920नागपुर अधिवेशन: असहयोग स्वीकार
1927–1928साइमन कमीशन
अक्टूबर 1929इरविन का डोमिनियन दर्जे का प्रस्ताव
दिसंबर 1929लाहौर अधिवेशन: पूर्ण स्वराज
नवंबर 1930पहला गोलमेज़ सम्मेलन
5 मार्च 1931गांधी-इरविन समझौता
दिसंबर 1931दूसरा गोलमेज़ सम्मेलन
सितंबर 1932पूना समझौता
1935भारत शासन अधिनियम, 1935
1937प्रांतीय चुनाव
1939कांग्रेस मंत्रिमंडलों का इस्तीफ़ा
1942क्रिप्स मिशन
अगस्त 1942भारत छोड़ो
16 मई 1946कैबिनेट मिशन योजना
9 दिसंबर 1946संविधान सभा की पहली बैठक
13 दिसंबर 1946उद्देश्य प्रस्ताव
3 जून 19473 जून की योजना: विभाजन के साथ स्वतंत्रता
15 अगस्त 1947स्वतंत्रता
26 नवंबर 1949संविधान अंगीकृत
26 जनवरी 1950संविधान लागू

गवर्नर-जनरल और वायसराय

वॉरेन हेस्टिंग्स (1773–1785)पहले गवर्नर-जनरल; न्याय में सुधार, हर ज़िले में दो अदालतें।
लॉर्ड वेलेज़ली (1798)सहायक संधि की व्यवस्था बनाई।
लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813–1823)सर्वोच्चता की नीति शुरू की।
लॉर्ड विलियम बेंटिंक (1820 के दशक का अंत)“सुधार” की नीतियाँ: पश्चिमी शिक्षा, विचार और संस्थाएँ।
हेनरी हार्डिंगसेना के उपकरणों के आधुनिकीकरण का प्रयास किया।
लॉर्ड डलहौज़ी (1848–1856)व्यपगत का सिद्धांत; 1856 में अवध का विलय।
लॉर्ड कैनिंग (1857)1857 में विद्रोहियों के प्रति नरमी की बात कही और ब्रिटिश प्रेस में उसका मज़ाक उड़ा।
लॉर्ड कर्ज़न (1905)बंगाल का विभाजन किया।
लॉर्ड इरविन (1929, 1931)‘डोमिनियन दर्जे’ का प्रस्ताव (1929); गांधीजी के साथ समझौता (1931)।
लॉर्ड विलिंगडन (1931 के बाद)दूसरे गोलमेज़ सम्मेलन के बाद के नए वायसराय; गांधीजी के प्रति बेहद असहानुभूतिपूर्ण।
लॉर्ड लिनलिथगो (1939)द्वितीय विश्व युद्ध में भारत की भूमिका पर उनसे वार्ता विफल हुई।
लॉर्ड वेवेल (फ़रवरी 1947 तक)कांग्रेस और लीग को वार्ता के लिए साथ लाए।
लॉर्ड माउंटबेटन (फ़रवरी 1947 से)घोषणा की कि ब्रिटिश भारत स्वतंत्र होगा पर बँटेगा।
सी. राजगोपालाचारी (1947 के बाद)स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल।

आगे क्या

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