🕉 धर्म और दर्शन
भारत के धर्म और दर्शन कैसे उभरे और बढ़े — घटनाएँ और चिंतक, एक ही टाइमलाइन पर। समय के साथ किसी परंपरा का अनुसरण करने के लिए उसे चुनिए।
- लगभग 1,500 ई.पू.
- लगभग 599 ई.पू.
- लगभग 599 ई.पू.
- लगभग 563 ई.पू.
- लगभग 563 ई.पू.
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लगभग 528 ई.पू.
बोधगया में बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति · बोधगया
- लगभग 527 ई.पू.
- लगभग 483 ई.पू.
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लगभग 483 ई.पू.
राजगृह में पहली बौद्ध संगीति · राजगीर
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लगभग 383 ई.पू.
वैशाली में दूसरी बौद्ध संगीति · वैशाली
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लगभग 250 ई.पू.
पाटलिपुत्र में तीसरी बौद्ध संगीति · पाटलिपुत्र
- लगभग 180 ई.पू.
- लगभग 150 ई.पू.
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लगभग 150 ई.पू.
भरहुत स्तूप की वेदिकाएँ उत्कीर्ण · भरहुत
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लगभग 50 ई.पू.
साँची के तोरण उत्कीर्ण · साँची
- लगभग 170 ई.
- लगभग 337 ई.
-
लगभग 427 ई.
नालंदा महाविहार की स्थापना · नालंदा
- लगभग 590 ई.
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लगभग 602 ई.
👤 ह्वेनसांग · लगभग 602 ई. – लगभग 664 ई.नालंदा में अध्ययन करने और हर्ष के दरबार में जाने वाले चीनी यात्री
- 635 ई.
- लगभग 636 ई.
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लगभग 788 ई.
👤 आदि शंकराचार्य · लगभग 788 ई. – लगभग 820 ई.अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक, जिन्होंने चार मठ स्थापित किए
- लगभग 1017
- लगभग 1088
- लगभग 1105
- लगभग 1134
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लगभग 1141
👤 ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती · लगभग 1141 – लगभग 1236अजमेर में भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना करने वाले सूफ़ी संत
- लगभग 1200
- 1238
- लगभग 1238
- लगभग 1270
- 1377
- लगभग 1440
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लगभग 1450
वाराणसी में कबीर की कविता · वाराणसी
- 1469
- 1469
- लगभग 1470
- लगभग 1478
- 1486
- लगभग 1498
- 1504
- लगभग 1532
- 1563
- 1604
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1606
गुरु अर्जन देव की शहादत · लाहौर
- लगभग 1608
- 1621
- 1666
-
1675
गुरु तेग़ बहादुर की शहादत · दिल्ली
-
1699
गुरु गोबिंद सिंह ने ख़ालसा की स्थापना की · आनंदपुर साहिब
-
1708
गुरु गोबिंद सिंह का निधन · नांदेड़
- 1772
- 1817
- 1824
- 1827
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1828
ब्रह्म समाज की स्थापना · कोलकाता
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1829
सती प्रथा का उन्मूलन · कोलकाता
- 1836
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1856
हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम · कोलकाता
- 1856
- 1863
- 1875
📘 एनसीईआरटी अध्ययन मार्गदर्शिका
Thinkers, Beliefs and Buildings
सांस्कृतिक विकास, लगभग 600 ई.पू. – 600 ई.
📄 अध्याय पढ़ें (PDF) ↗Bhakti-Sufi Traditions
धार्मिक विश्वासों और भक्ति ग्रंथों में बदलाव, लगभग आठवीं से अठारहवीं सदी
📄 अध्याय पढ़ें (PDF) ↗प्रविष्टियाँ उनके नाम और विवरण के आधार पर परंपराओं में रखी गई हैं; कुछ एक से अधिक में हैं। तिथियाँ हर पेज के स्रोतों के अनुसार हैं; कई आरंभिक तिथियाँ पारंपरिक या अनुमानित हैं।