History of Medieval India
सल्तनत, मुग़लों और क्षेत्रीय राज्यों पर सबसे भरोसेमंद एक-खंडीय पुस्तक।
तीन सदियों से अधिक समय तक दिल्ली से शासन करने वाले पाँच क्रमिक वंश।
समय के साथ अनुमानित विस्तार (ठोस = नवीनतम, बिंदुदार = पहले का)।
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| राजवंश | काल | टिप्पणी |
|---|---|---|
| मामलुक (ग़ुलाम) वंश | 1206 – 1290 | क़ुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, रज़िया और बलबन। |
| ख़िलजी वंश | 1290 – 1320 | अलाउद्दीन ख़िलजी के बाज़ार सुधार और दक्षिणी अभियान। |
| तुग़लक़ वंश | 1320 – 1414 | सल्तनत का सबसे बड़ा विस्तार; मुहम्मद बिन तुग़लक़ के प्रयोग। |
| सैयद वंश | 1414 – 1451 | तैमूर के आक्रमण के बाद सिकुड़ी हुई सल्तनत। |
| लोदी वंश | 1451 – 1526 | अफ़ग़ान वंश, जिसे बाबर ने पानीपत में समाप्त किया। |
चुने हुए शासक; सूची में अंतराल का अर्थ राजवंश में अंतराल नहीं है।
| वर्ष | घटना | स्थान |
|---|---|---|
| 1206 | दिल्ली सल्तनत की स्थापना मुहम्मद ग़ोरी की मृत्यु के बाद क़ुतुबुद्दीन ऐबक स्वतंत्र हुआ। |
दिल्ली / लाहौर |
| 1211 | इल्तुतमिश सुल्तान बना | दिल्ली |
| 1229 | इल्तुतमिश को ख़लीफ़ा से मान्यता-पत्र मिला | दिल्ली |
| 1236 | रज़िया सुल्तान सिंहासन पर बैठी | दिल्ली |
| 1240 | रज़िया सुल्तान पदच्युत और मारी गई सत्ता 'चालीसा' कहलाने वाले तुर्क अमीरों के हाथ गई। |
कैथल |
| 1266 | बलबन सुल्तान बना | दिल्ली |
| 1290 | ख़िलजी क्रांति | दिल्ली |
| 1296 | अलाउद्दीन ख़िलजी सुल्तान बना उसने अपने चाचा जलालुद्दीन की हत्या करवाई। |
दिल्ली |
| 1296 | अलाउद्दीन ख़िलजी का देवगिरि पर आक्रमण | देवगिरि |
| 1299 | कीली में मंगोल पराजित अलाउद्दीन ख़िलजी की सेना ने क़ुतलुग़ ख़्वाजा का मंगोल आक्रमण विफल किया। |
कीली, दिल्ली के पास |
| 1301 | अलाउद्दीन ख़िलजी ने रणथंभौर जीता हम्मीरदेव चौहान मारा गया। |
रणथंभौर |
| 1303 | चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी अलाउद्दीन ख़िलजी ने चित्तौड़ जीता। लंबी घेराबंदी के बाद चित्तौड़ अलाउद्दीन ख़िलजी के हाथ आ गया। |
चित्तौड़गढ़ |
| 1310 | मलिक काफ़ूर ने वारंगल जीता काकतीय शासक प्रतापरुद्र दिल्ली का करद बन गया। |
वारंगल |
| 1311 | मलिक काफ़ूर का दक्षिणी अभियान मदुरै पहुँचा पांड्य राजधानी लूटी गई और उसका ख़ज़ाना दिल्ली ले जाया गया। |
मदुरै |
| 1316 | अलाउद्दीन ख़िलजी की मृत्यु मलिक काफ़ूर ने कुछ समय सत्ता हथियाई; चार वर्ष बाद ख़िलजियों का पतन हुआ। |
दिल्ली |
| 1320 | ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने तुग़लक़ वंश की स्थापना की | दिल्ली |
| 1323 | काकतीयों का पतन वारंगल मिला लिया गया और काकतीय वंश समाप्त हुआ। |
वारंगल |
| 1327 | राजधानी दौलताबाद स्थानांतरित मुहम्मद बिन तुग़लक़ द्वारा राजधानी का स्थानांतरण। इससे भारी कष्ट हुआ और कुछ वर्षों में निर्णय पलट दिया गया। |
दौलताबाद |
| लगभग 1329 | मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने सांकेतिक मुद्रा चलाई पीतल और ताँबे के सिक्के चाँदी के मूल्य पर चलने थे। व्यापक जालसाज़ी के कारण सिक्के वापस लेने पड़े। |
दिल्ली |
| 1334 | इब्न बतूता दिल्ली पहुँचा | दिल्ली |
| 1351 | फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ सुल्तान बना | दिल्ली |
| 1398 | तैमूर ने दिल्ली लूटी दिल्ली तबाह हो गई और तुग़लक़ सल्तनत फिर कभी नहीं सँभली। |
दिल्ली |
| 1414 | ख़िज़्र ख़ान ने सैयद वंश की स्थापना की | दिल्ली |
| 1451 | बहलोल लोदी ने लोदी वंश की स्थापना की दिल्ली का पहला अफ़ग़ान वंश। |
दिल्ली |
| 1504 | सिकंदर लोदी ने आगरा बसाया आगरा लोदियों और बाद में मुग़लों की राजधानी बना। |
आगरा |
सल्तनत, मुग़लों और क्षेत्रीय राज्यों पर सबसे भरोसेमंद एक-खंडीय पुस्तक।
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