The Delhi Sultanate: A Political and Military History
सल्तनत और मंगोलों से उसके युद्धों का विद्वत्तापूर्ण इतिहास।
तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही लिखने वाले इतिहासकार.
किसी भी वर्ष में उनकी आयु, तब का शासक और घटनाएँ देखने के लिए चार्ट पर पॉइंटर घुमाइए; खोलने के लिए किसी भी चीज़ पर क्लिक कीजिए।
मानचित्र उनके जीवनकाल के आसपास तुग़लक़ वंश को और उनके जीवनकाल की घटनाओं के स्थान दिखाता है।
घटना देखने के लिए बिंदु पर पॉइंटर रखिए; उस वर्ष का पूरा मानचित्र खोलने के लिए क्लिक कीजिए।
| 1290 | ख़िलजी क्रांति |
| 1292 | मार्को पोलो की पांड्य तट यात्रा |
| 1296 | अलाउद्दीन ख़िलजी सुल्तान बना |
| 1296 | अलाउद्दीन ख़िलजी का देवगिरि पर आक्रमण |
| 1299 | कीली में मंगोल पराजित अलाउद्दीन ख़िलजी की सेना ने क़ुतलुग़ ख़्वाजा का मंगोल आक्रमण विफल किया। |
| 1301 | अलाउद्दीन ख़िलजी ने रणथंभौर जीता हम्मीरदेव चौहान मारा गया। |
| 1303 | चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी लंबी घेराबंदी के बाद चित्तौड़ अलाउद्दीन ख़िलजी के हाथ आ गया। |
| 1310 | मलिक काफ़ूर ने वारंगल जीता काकतीय शासक प्रतापरुद्र दिल्ली का करद बन गया। |
| 1311 | मलिक काफ़ूर का दक्षिणी अभियान मदुरै पहुँचा पांड्य राजधानी लूटी गई और उसका ख़ज़ाना दिल्ली ले जाया गया। |
| 1316 | अलाउद्दीन ख़िलजी की मृत्यु मलिक काफ़ूर ने कुछ समय सत्ता हथियाई; चार वर्ष बाद ख़िलजियों का पतन हुआ। |
| 1320 | ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने तुग़लक़ वंश की स्थापना की |
| 1323 | काकतीयों का पतन वारंगल मिला लिया गया और काकतीय वंश समाप्त हुआ। |
| 1327 | राजधानी दौलताबाद स्थानांतरित इससे भारी कष्ट हुआ और कुछ वर्षों में निर्णय पलट दिया गया। |
| लगभग 1329 | मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने सांकेतिक मुद्रा चलाई व्यापक जालसाज़ी के कारण सिक्के वापस लेने पड़े। |
| 1334 | इब्न बतूता दिल्ली पहुँचा |
| 1336 | विजयनगर की स्थापना |
| 1343 | इब्न बतूता मालदीव में क़ाज़ी रहा |
| 1347 | बहमनी सल्तनत की स्थापना |
| 1351 | फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ सुल्तान बना |
| 1352 | इलियास शाह ने बंगाल को एकीकृत किया |
जीवनकाल के साझा वर्षों के अनुसार क्रमबद्ध। पट्टी दिखाती है कि ज़ियाउद्दीन बरनी के जीवन में कब।
सल्तनत और मंगोलों से उसके युद्धों का विद्वत्तापूर्ण इतिहास।
शुरुआत का सबसे आसान रास्ता: छोटी, सचित्र और अनगिनत परीक्षा प्रश्नों का आधार।
हड़प्पा, विजयनगर, मुग़ल दरबार और 1857 पर स्रोत-आधारित अध्याय — UPSC के लिए अनिवार्य।
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