A History of Nepal
गोरखा एकीकरण से गणराज्य तक नेपाल का संक्षिप्त, विश्वसनीय इतिहास।
राजपूतकालीन क्षेत्रीय राजवंश, जबकि उत्तर-पश्चिम से गज़नवी और गौरी आगे बढ़ते हैं।
किसी भी वर्ष में कौन-सी सत्ताएँ थीं, यह देखने के लिए चार्ट पर पॉइंटर घुमाइए; उसका पेज खोलने के लिए पट्टी पर, या मानचित्र खोलने के लिए ख़ाली जगह पर क्लिक कीजिए।
| नाम | प्रकार | अवधि | क्षेत्र | राजधानी |
|---|---|---|---|---|
| शाकंभरी के चाहमान (चौहान) ★ | राजवंश | लगभग 650 ई. – लगभग 1194 | पश्चिम | शाकंभरी / अजमेर |
| ग़ज़नवी साम्राज्य ★ | साम्राज्य | लगभग 977 ई. – लगभग 1186 | उत्तर-पश्चिम | ग़ज़नी, बाद में लाहौर |
| मालदीव सल्तनत ★ | सल्तनत | लगभग 1153 – 1968 | द्वीप | माले |
| त्रिपुरी के कलचुरि | राजवंश | लगभग 675 ई. – 1212 | मध्य भारत | त्रिपुरी |
| मेदपाट के गुहिल | राजवंश | लगभग 728 ई. – 1303 | पश्चिम | नागदा / चित्तौड़ |
| दिल्ली के तोमर | राजवंश | लगभग 736 ई. – लगभग 1152 | उत्तर | ढिल्लिका (दिल्ली) |
| परमार वंश | राजवंश | लगभग 800 ई. – 1305 | मध्य भारत | धारा (धार) |
| चंदेल वंश | राजवंश | लगभग 831 ई. – 1315 | मध्य भारत | खजुराहो / महोबा |
| गुजरात के चौलुक्य (सोलंकी) | राजवंश | लगभग 940 ई. – 1244 | पश्चिम | अणहिलपाटक (पाटन) |
| कश्मीर का लोहार वंश | राजवंश | लगभग 1003 – लगभग 1171 | उत्तर | श्रीनगर |
| सूमरा वंश | राजवंश | लगभग 1026 – 1351 | उत्तर-पश्चिम | ठट्टा क्षेत्र |
| सेन वंश | राजवंश | लगभग 1070 – 1230 | पूर्व | नवद्वीप / लखनौती |
| गहड़वाल वंश | राजवंश | लगभग 1089 – लगभग 1197 | गंगा का मैदान | कन्नौज / वाराणसी |
| खस मल्ल राज्य | राज्य | लगभग 1100 – लगभग 1400 | हिमालय | सिंजा |
| आमेर (जयपुर) के कछवाहा | राजवंश | लगभग 1128 – 1949 | पश्चिम | आमेर, बाद में जयपुर |
| गौरी साम्राज्य | साम्राज्य | लगभग 1175 – 1206 | उत्तर-पश्चिम | फ़िरोज़कोह / ग़ज़नी |
| मणिपुर राज्य | राज्य | लगभग 1110 – 1949 | पूर्वोत्तर | कांगला (इंफाल) |
| वाघेला वंश | राजवंश | 1244 – 1304 | पश्चिम | धोलका / पाटन |
| वर्ष | घटना | राज्य |
|---|---|---|
| 1000 | महमूद ग़ज़नवी ने भारत पर हमले शुरू किए 25 वर्षों में लगभग सत्रह हमले हुए। |
ग़ज़नवी साम्राज्य |
| 1001 | महमूद ने पेशावर में जयपाल को हराया जयपाल बंदी बनाया गया और बाद में उसने सिंहासन त्याग दिया। |
ग़ज़नवी साम्राज्य |
| 1008 | छछ का युद्ध आनंदपाल का गठबंधन हारा, जिससे पंजाब महमूद के लिए खुल गया। |
ग़ज़नवी साम्राज्य |
| 1010 | बृहदीश्वर मंदिर पूर्ण | चोल साम्राज्य |
| 1014 | राजेंद्र प्रथम चोल राजा बना | चोल साम्राज्य |
| 1017 | चोलों की श्रीलंका विजय पूर्ण उत्तरी श्रीलंका चोलों का 'मुम्मुडि-चोल-मंडलम' प्रांत बन गया। |
चोल साम्राज्य |
| 1018 | महमूद ने मथुरा और कन्नौज लूटे प्रतिहार राजधानी लूटी गई। |
ग़ज़नवी साम्राज्य |
| लगभग 1023 | राजेंद्र का गंगा अभियान; गंगैकोंड चोलपुरम की स्थापना चोल सेनाएँ गंगा तक पहुँचीं और विजय की स्मृति में नई राजधानी बसाई गई। |
चोल साम्राज्य |
| 1025 | श्रीविजय पर चोल नौसैनिक अभियान श्रीविजय के बंदरगाहों पर हमले से चीन तक चोल व्यापार मार्ग सुरक्षित हुए। |
चोल साम्राज्य |
| 1026 | महमूद ग़ज़नवी का सोमनाथ पर आक्रमण सोमनाथ मंदिर लूटा गया और महमूद भारी ख़ज़ाना ग़ज़नी ले गया। |
ग़ज़नवी साम्राज्य |
| 1030 | अल-बिरूनी ने किताब-उल-हिंद लिखी | ग़ज़नवी साम्राज्य |
| लगभग 1055 | राजा भोज की मृत्यु चौलुक्यों और कलचुरियों के हमलों से परमार शक्ति घटी। |
परमार वंश |
| 1070 | विजयबाहु प्रथम ने चोलों को श्रीलंका से निकाला पोलोन्नरुवा को राजधानी बनाकर सिंहली शासन बहाल हुआ। |
पोलोन्नरुवा राज्य |
| 1076 | विक्रमादित्य षष्ठ का चालुक्य-विक्रम संवत | कल्याणी के पश्चिमी चालुक्य |
| लगभग 1135 | पुरी के जगन्नाथ मंदिर का निर्माण आरंभ | पूर्वी गंग वंश |
| 1148 | कल्हण ने राजतरंगिणी लिखना आरंभ किया | कश्मीर का लोहार वंश |
| 1153 | मालदीव ने इस्लाम अपनाया | मालदीव सल्तनत |
| 1153 | पराक्रमबाहु प्रथम का श्रीलंका पर शासन | पोलोन्नरुवा राज्य |
| लगभग 1161 | पाल वंश का अंत सेन बंगाल की प्रमुख शक्ति बन गए। |
पाल साम्राज्य |
| 1175 | मुहम्मद ग़ोरी ने मुल्तान जीता | गौरी साम्राज्य |
| 1178 | कासहृद का युद्ध: ग़ोरी पराजित मुहम्मद ग़ोरी को गुजरात से खदेड़ दिया गया। |
गुजरात के चौलुक्य (सोलंकी) |
| 1186 | ग़ोरियों ने लाहौर लिया, ग़ज़नवियों का अंत अंतिम ग़ज़नवी शासक ख़ुसरो मलिक बंदी बना लिया गया। |
गौरी साम्राज्य |
| लगभग 1190 | जाम की मीनार का निर्माण | गौरी साम्राज्य |
| 1191 | तराइन का पहला युद्ध पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद ग़ोरी को हराया, जो घायल होकर लौट गया। |
शाकंभरी के चाहमान (चौहान) |
| 1192 | तराइन का दूसरा युद्ध पृथ्वीराज चौहान पराजित होकर मारा गया, और उत्तर भारत ग़ोरियों के लिए खुल गया। |
गौरी साम्राज्य |
| 1194 | चंदावर का युद्ध जयचंद्र मारा गया और ग़ोरियों ने कन्नौज व वाराणसी ले लिए। |
गौरी साम्राज्य |
| लगभग 1200 | नालंदा का विनाश | |
| लगभग 1203 | विक्रमशिला का विनाश | |
| लगभग 1204 | बख़्तियार ख़िलजी ने नदिया जीता लक्ष्मण सेन पूर्वी बंगाल भाग गया और बंगाल में तुर्क शासन आरंभ हुआ। |
गौरी साम्राज्य |
| 1206 | दिल्ली सल्तनत की स्थापना | मामलुक (ग़ुलाम) वंश |
गोरखा एकीकरण से गणराज्य तक नेपाल का संक्षिप्त, विश्वसनीय इतिहास।
शुरुआत का सबसे आसान रास्ता: छोटी, सचित्र और अनगिनत परीक्षा प्रश्नों का आधार।
हड़प्पा, विजयनगर, मुग़ल दरबार और 1857 पर स्रोत-आधारित अध्याय — UPSC के लिए अनिवार्य।
कला और स्थापत्य के प्रश्नों का मानक आधार — स्तूप, मंदिर और मूर्तिकला।
योग्य ख़रीद पर हमें थोड़ा कमीशन मिल सकता है, आपको कोई अतिरिक्त ख़र्च नहीं। सभी अनुशंसित पुस्तकें देखें →
गुप्तों के बाद 'भारतीय सामंतवाद' का पक्ष: भूमि-अनुदान, व्यापार का ह्रास और आश्रित किसान।
सामंतवाद मॉडल की सबसे प्रसिद्ध आलोचना; इसे आर. एस. शर्मा के उत्तर के साथ पढ़ें।
आरंभिक मध्यकालीन भारत को समझने के लिए 'एकीकरण' — नए क्षेत्रों में राज्य-समाज का प्रसार — का प्रस्ताव।