A History of Sri Lanka
अनुराधापुर से स्वतंत्रता तक श्रीलंका का मानक इतिहास।
कोई एक शक्ति नहीं: शुंग, सातवाहन, हिंद-यवन, शक, कुषाण और संगमकालीन तमिल राज्य।
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| नाम | प्रकार | अवधि | क्षेत्र | राजधानी |
|---|---|---|---|---|
| अनुराधापुर राज्य ★ | राज्य | लगभग 437 ई.पू. – लगभग 1017 | श्रीलंका | अनुराधापुर |
| सातवाहन साम्राज्य ★ | साम्राज्य | लगभग 200 ई.पू. – लगभग 225 ई. | दक्कन | प्रतिष्ठान / अमरावती |
| आरंभिक पांड्य (संगम युग) | राज्य | लगभग 400 ई.पू. – लगभग 300 ई. | दक्षिण | मदुरै / कोरकई |
| आरंभिक चोल (संगम युग) | राज्य | लगभग 300 ई.पू. – लगभग 300 ई. | दक्षिण | उरैयूर / पुहार |
| आरंभिक चेर (संगम युग) | राज्य | लगभग 300 ई.पू. – लगभग 300 ई. | दक्षिण | वंजी (करूर / मुज़िरिस) |
| कलिंग का महामेघवाहन (चेदि) वंश | राजवंश | लगभग 200 ई.पू. – लगभग 50 ई. | पूर्व | कलिंगनगरी |
| हिंद-यवन राज्य | विदेशी / उत्तर-पश्चिमी राज्य | लगभग 200 ई.पू. – लगभग 10 ई. | उत्तर-पश्चिम | सागल / तक्षशिला |
| शुंग वंश | राजवंश | लगभग 185–73 ई.पू. | गंगा का मैदान | पाटलिपुत्र / विदिशा |
| हिंद-शक राज्य | विदेशी / उत्तर-पश्चिमी राज्य | लगभग 110 ई.पू. – लगभग 80 ई. | उत्तर-पश्चिम | तक्षशिला / मथुरा |
| कण्व वंश | राजवंश | लगभग 73–28 ई.पू. | पूर्व | पाटलिपुत्र |
| हिंद-पार्थियाई राज्य | विदेशी / उत्तर-पश्चिमी राज्य | लगभग 19 ई. – लगभग 100 ई. | उत्तर-पश्चिम | टैक्सिला (तक्षशिला) |
| पश्चिमी क्षत्रप | राजवंश | लगभग 35 ई. – लगभग 415 ई. | पश्चिम | उज्जैन / भरुकच्छ |
| विजयपुरी के इक्ष्वाकु | राजवंश | लगभग 225 ई. – लगभग 340 ई. | दक्कन | विजयपुरी (नागार्जुनकोंडा) |
| कलभ्र अंतराल | राजवंश | लगभग 250 ई. – लगभग 600 ई. | दक्षिण | |
| संगमकालीन तमिल सरदार (वेलिर) | सरदारियाँ | लगभग 300 ई.पू. – लगभग 300 ई. | दक्षिण | |
| यौधेय गणराज्य | गण-संघ (गणराज्य) | लगभग 200 ई.पू. – लगभग 350 ई. | उत्तर | रोहितक |
| रुहुण रियासत | राज्य | लगभग 200 ई.पू. – लगभग 1070 | श्रीलंका | महागाम (तिस्सामहाराम) |
| वर्ष | घटना | राज्य |
|---|---|---|
| लगभग 185 ई.पू. | पुष्यमित्र शुंग ने बृहद्रथ की हत्या की मौर्य वंश समाप्त हुआ और शुंग वंश आरंभ हुआ। |
शुंग वंश |
| लगभग 180 ई.पू. | डेमेट्रियस प्रथम का उत्तर-पश्चिम भारत पर आक्रमण हिंदूकुश के दक्षिण में हिंद-यूनानी शासन की स्थापना हुई। |
हिंद-यवन राज्य |
| लगभग 161 ई.पू. | दुट्ठगामणी ने श्रीलंका को एकीकृत किया | अनुराधापुर राज्य |
| लगभग 150 ई.पू. | खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख | कलिंग का महामेघवाहन (चेदि) वंश |
| लगभग 150 ई.पू. | मिनांडर का शासन; मिलिंदपन्हो संवाद | हिंद-यवन राज्य |
| लगभग 150 ई.पू. | भरहुत स्तूप की वेदिकाएँ उत्कीर्ण | शुंग वंश |
| लगभग 113 ई.पू. | विदिशा में हेलियोडोरस स्तंभ | हिंद-यवन राज्य |
| 57 ई.पू. | विक्रम संवत का आरंभ | |
| लगभग 50 ई.पू. | साँची के तोरण उत्कीर्ण | सातवाहन साम्राज्य |
| लगभग 29 ई.पू. | अलुविहार में पालि त्रिपिटक लिपिबद्ध | अनुराधापुर राज्य |
| लगभग 28 ई.पू. | सातवाहनों ने कण्व वंश का अंत किया कण्व वंश समाप्त हुआ। |
सातवाहन साम्राज्य |
| लगभग 30 ई. | कुजुल कडफ़िसेस ने कुषाणों को एकजुट किया पाँच यूएझी क़बीले एक शासक के अधीन एक हुए। |
कुषाण साम्राज्य |
| लगभग 46 ई. | तख़्त-ए-बाही विहार की स्थापना | हिंद-पार्थियाई राज्य |
| लगभग 50 ई. | अरिकमेडु और मुज़िरिस में रोमन व्यापार | आरंभिक चोल (संगम युग) |
| लगभग 52 ई. | परंपरा के अनुसार संत थॉमस मुज़िरिस पहुँचे | आरंभिक चेर (संगम युग) |
| 78 ई. | शक संवत का आरंभ | पश्चिमी क्षत्रप |
| लगभग 100 ई. | कार्ले और नासिक के चैत्य-गृह | सातवाहन साम्राज्य |
| लगभग 124 ई. | गौतमीपुत्र शातकर्णी ने नहपान को हराया सातवाहनों ने क्षहरातों से पश्चिमी दक्कन वापस ले लिया। |
सातवाहन साम्राज्य |
| लगभग 127 ई. | कनिष्क का राज्यारोहण | कुषाण साम्राज्य |
| लगभग 150 ई. | रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख | पश्चिमी क्षत्रप |
| लगभग 230 ई. | पश्चिमी कुषाण प्रदेशों पर ससानी विजय कुषाणशाह राज्यपाल ससानियों के अधीन बैक्ट्रिया पर शासन करने लगे। |
कुषाण साम्राज्य |
| लगभग 240 ई. | श्रीगुप्त ने गुप्त वंश की नींव रखी | गुप्त साम्राज्य |
| लगभग 250 ई. | इक्ष्वाकुओं के अधीन नागार्जुनकोंडा का उत्कर्ष | विजयपुरी के इक्ष्वाकु |
| लगभग 275 ई. | कांची में पल्लव शासन का आरंभ | पल्लव वंश |
अनुराधापुर से स्वतंत्रता तक श्रीलंका का मानक इतिहास।
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