संदर्भ ग्रंथ
A History of Nepal
गोरखा एकीकरण से गणराज्य तक नेपाल का संक्षिप्त, विश्वसनीय इतिहास।
पानीपत में बाबर की विजय से बहादुर शाह द्वितीय के पदच्युत होने तक।
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| नाम | प्रकार | अवधि | क्षेत्र | राजधानी |
|---|---|---|---|---|
| कैंडी राज्य ★ | राज्य | लगभग 1469 – 1815 | श्रीलंका | सेंकडगल (कैंडी) |
| मुग़ल साम्राज्य ★ | साम्राज्य | 1526 – 1857 | उत्तर | आगरा / फ़तेहपुर सीकरी / दिल्ली (शाहजहानाबाद) |
| कोच राज्य (कामता / कूचबिहार) | राज्य | 1515 – 1949 | पूर्वोत्तर | कामतापुर / कूचबिहार |
| मदुरै के नायक | राज्य | 1529 – 1736 | दक्षिण | मदुरै / तिरुचिरापल्ली |
| गोरखा राज्य | राज्य | 1559 – 1768 | हिमालय | गोरखा |
| शबद्रुंग के अधीन भूटान (द्रुक देसी) | धर्मतांत्रिक राज्य | 1616 – 1907 | हिमालय | पुनाखा |
| कोचीन राज्य | राज्य | लगभग 1102 – 1949 | दक्षिण | कोच्चि / त्रिशूर |
| चौबीसी और बाईसी रियासतें | सरदारियाँ | लगभग 1400 – 1786 | हिमालय | |
| बीकानेर राज्य | राज्य | 1465 – 1949 | पश्चिम | बीकानेर |
| कांतिपुर (काठमांडू) | राज्य | 1482 – 1769 | हिमालय | कांतिपुर (काठमांडू) |
| ललितपुर (पाटन) | राज्य | 1482 – 1769 | हिमालय | ललितपुर (पाटन) |
| भक्तपुर | राज्य | 1482 – 1769 | हिमालय | भक्तपुर |
| केलदी नायक (इक्केरी) | राज्य | 1499 – 1763 | दक्षिण | इक्केरी / बेदनूर |
| सफ़वी साम्राज्य (पूर्वी प्रांत) | विदेशी / उत्तर-पश्चिमी राज्य | 1501 – 1736 | उत्तर-पश्चिम | हेरात |
| सीतावाका राज्य | राज्य | 1521 – 1594 | श्रीलंका | सीतावक |
| तंजावुर के नायक | राज्य | 1532 – 1673 | दक्षिण | तंजावुर |
| सिक्किम राज्य | राज्य | 1642 – 1975 | पूर्वोत्तर | युकसोम, बाद में गंगटोक |
| वर्ष | घटना | राज्य |
|---|---|---|
| 1526 | पानीपत का पहला युद्ध इब्राहीम लोदी मारा गया और बाबर ने मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1527 | खानवा का युद्ध बाबर ने राणा सांगा के राजपूत संघ को हराकर उत्तर में मुग़ल शासन सुरक्षित किया। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1529 | घाघरा का युद्ध बाबर ने पूर्व के अफ़ग़ान सरदारों को हराया। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1530 | बाबर की मृत्यु; हुमायूँ उत्तराधिकारी | मुग़ल साम्राज्य |
| 1535 | हुमायूँ ने मांडू और चंपानेर जीते | मुग़ल साम्राज्य |
| 1539 | चौसा का युद्ध हुमायूँ हारा और गंगा तैरकर बच निकला। |
सूर साम्राज्य |
| 1540 | कन्नौज का युद्ध हुमायूँ निर्वासन में भागा और शेरशाह ने सूर साम्राज्य की स्थापना की। |
सूर साम्राज्य |
| 1541 | शेरशाह ने रोहतास क़िले का निर्माण आरंभ किया | सूर साम्राज्य |
| 1545 | कालिंजर में शेरशाह की मृत्यु | सूर साम्राज्य |
| 1555 | हुमायूँ ने दिल्ली वापस ली (सरहिंद का युद्ध) हुमायूँ ने सूरों से अपना सिंहासन वापस पाया। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1556 | पानीपत का दूसरा युद्ध हेमू पकड़ा गया और मारा गया, जिससे अकबर का सिंहासन सुरक्षित हुआ। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1558 | पुर्तगालियों ने माले पर क़ब्ज़ा किया | पुर्तगाली माले |
| 1559 | द्रव्य शाह ने गोरखा राज्य की स्थापना की | गोरखा राज्य |
| 1564 | अकबर ने जज़िया समाप्त किया | मुग़ल साम्राज्य |
| 1565 | तालीकोटा का युद्ध विजयनगर की सेना बिखर गई और उसकी राजधानी हम्पी लूट ली गई। |
तुलुव वंश |
| 1568 | अकबर ने चित्तौड़गढ़ जीता चित्तौड़ का पतन हुआ और राणा उदय सिंह ने राजधानी उदयपुर ले गए। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1571 | फ़तेहपुर सीकरी की स्थापना | मुग़ल साम्राज्य |
| 1573 | अकबर ने गुजरात जीता | मुग़ल साम्राज्य |
| 1573 | मुहम्मद ठाकुरुफ़ानु ने मालदीव को मुक्त कराया पंद्रह वर्ष बाद पुर्तगालियों को निकाल दिया गया। |
मालदीव सल्तनत |
| 1576 | हल्दीघाटी का युद्ध मैदान मुग़लों के हाथ रहा, पर महाराणा प्रताप बचकर प्रतिरोध जारी रखने निकल गए। |
मेवाड़ (सिसोदिया) |
| 1576 | राजमहल का युद्ध: मुग़लों ने बंगाल लिया दाऊद ख़ान कर्रानी मारा गया और बंगाल मुग़ल सूबा बन गया। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1580 | अकबर ने साम्राज्य को सूबों में बाँटा साम्राज्य को एकसमान प्रशासन वाले बारह प्रांतों में बाँटा गया। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1582 | अकबर का दीन-ए-इलाही | मुग़ल साम्राज्य |
| 1586 | मुग़लों ने कश्मीर मिलाया | मुग़ल साम्राज्य |
| 1591 | चारमीनार का निर्माण | गोलकुंडा सल्तनत (क़ुतुब शाही) |
| 1600 | ईस्ट इंडिया कंपनी को चार्टर मिला | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1601 | असीरगढ़ अकबर के हाथ आया | मुग़ल साम्राज्य |
| 1602 | डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) की स्थापना | भारत में डच ईस्ट इंडिया कंपनी (वीओसी) |
| 1604 | हरमंदिर साहिब में आदि ग्रंथ की स्थापना | |
| 1605 | अकबर की मृत्यु | मुग़ल साम्राज्य |
| 1606 | गुरु अर्जन देव की शहादत गुरु हरगोबिंद के नेतृत्व में सिख धर्म ने सैन्य स्वरूप अपनाना शुरू किया। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1611 | मसूलीपट्टनम में अंग्रेज़ी फ़ैक्ट्री | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1612 | स्वाली का युद्ध अंग्रेज़ों ने पुर्तगालियों को हराकर सूरत में व्यापार के अधिकार पाए। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1615 | जहाँगीर के दरबार में सर टॉमस रो | मुग़ल साम्राज्य |
| 1616 | झबद्रुंग ङवांग नामग्याल भूटान पहुँचे | शबद्रुंग के अधीन भूटान (द्रुक देसी) |
| 1628 | शाहजहाँ बादशाह बना | मुग़ल साम्राज्य |
| 1632 | ताजमहल का निर्माण आरंभ | मुग़ल साम्राज्य |
| 1639 | मद्रास में फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज की स्थापना | फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज, मद्रास |
| 1646 | विजयनगर का अंतिम गढ़ गिरा | अराविडु वंश |
| 1648 | शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) का उद्घाटन | मुग़ल साम्राज्य |
| 1653 | ताजमहल पूर्ण | मुग़ल साम्राज्य |
| 1656 | डचों ने पुर्तगालियों से कोलंबो लिया 1658 तक श्रीलंका में पुर्तगाली शासन समाप्त हो गया। |
डच सीलोन |
| 1658 | औरंगज़ेब बादशाह बना | मुग़ल साम्राज्य |
| 1659 | शिवाजी ने प्रतापगढ़ में अफ़ज़ल ख़ान को मारा बीजापुर की सेना तितर-बितर हुई और शिवाजी की शक्ति बढ़ी। |
|
| 1661 | बंबई इंग्लैंड को मिला | पुर्तगाली बसई और बंबई |
| 1664 | शिवाजी ने सूरत लूटा | |
| 1665 | पुरंदर की संधि शिवाजी ने 23 क़िले मुग़लों को सौंपे और औरंगज़ेब के दरबार में जाना स्वीकार किया। |
|
| 1666 | शिवाजी आगरा से बच निकले | |
| 1671 | सराईघाट का युद्ध अहोमों ने मुग़लों को हराया और असम स्वतंत्र बना रहा। |
अहोम राज्य |
| 1674 | शिवाजी का छत्रपति के रूप में राज्याभिषेक | मराठा साम्राज्य |
| 1675 | गुरु तेग़ बहादुर की शहादत | मुग़ल साम्राज्य |
| 1679 | औरंगज़ेब ने फिर से जज़िया लगाया इससे अनेक राजपूत और अन्य प्रजाजन विमुख हुए। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1680 | शिवाजी की मृत्यु उनके पुत्र संभाजी उत्तराधिकारी बने। |
मराठा साम्राज्य |
| 1681 | औरंगज़ेब दक्कन गया | मुग़ल साम्राज्य |
| 1686 | मुग़लों ने बीजापुर मिलाया बीजापुर का आदिलशाही वंश समाप्त हुआ। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1687 | मुग़लों ने गोलकुंडा मिलाया गोलकुंडा का क़ुतुबशाही वंश समाप्त हुआ। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1689 | संभाजी का वध | मराठा साम्राज्य |
| 1690 | जॉब चार्नॉक ने कलकत्ता बसाया कलकत्ता आगे चलकर ब्रिटिश भारत की राजधानी बना। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1699 | गुरु गोबिंद सिंह ने ख़ालसा की स्थापना की | |
| 1707 | औरंगज़ेब की मृत्यु | मुग़ल साम्राज्य |
| 1708 | गुरु गोबिंद सिंह का निधन उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत गुरु घोषित किया। |
|
| 1709 | कंधार में मीरवाइस होतक का विद्रोह | होतक वंश |
| 1713 | बालाजी विश्वनाथ पेशवा बने | मराठा साम्राज्य |
| 1716 | बंदा सिंह बहादुर की शहादत | मुग़ल साम्राज्य |
| 1717 | फ़र्रुख़सियर का ईस्ट इंडिया कंपनी को फ़रमान | मुग़ल साम्राज्य |
| 1720 | बाजीराव प्रथम पेशवा बने | मराठा साम्राज्य |
| 1724 | शकर खेड़ा का युद्ध: हैदराबाद राज्य की स्थापना निज़ाम-उल-मुल्क ने मुग़ल सूबेदार को हराकर हैदराबाद राज्य की स्थापना की। |
हैदराबाद राज्य (निज़ाम) |
| 1737 | बाजीराव का दिल्ली पर धावा | मराठा साम्राज्य |
| 1739 | नादिर शाह ने दिल्ली लूटी दिल्ली लूटी गई और मयूर सिंहासन व कोहिनूर फ़ारस ले जाए गए। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1741 | कोलाचेल का युद्ध त्रावणकोर ने डचों को हराया, जिससे केरल में डच महत्वाकांक्षाएँ समाप्त हुईं। |
त्रावणकोर |
| 1742 | बंगाल पर मराठा (बरगी) हमले | बंगाल के नवाब |
| 1746 | फ़्रांसीसियों ने मद्रास जीता (प्रथम कर्नाटक युद्ध) | फ्रांसीसी भारत |
| 1747 | अहमद शाह दुर्रानी ने दुर्रानी साम्राज्य की स्थापना की | दुर्रानी साम्राज्य |
| 1749 | अंबूर का युद्ध अनवरुद्दीन ख़ान मारा गया; फ़्रांसीसी समर्थित चंदा साहिब ने अर्काट लिया। |
कर्नाटक (आरकाट के नवाब) |
| 1751 | अर्काट की घेराबंदी क्लाइव की अर्काट रक्षा ने दूसरे कर्नाटक युद्ध को ब्रिटेन के पक्ष में मोड़ दिया। |
कर्नाटक (आरकाट के नवाब) |
| 1757 | प्लासी का युद्ध सिराजुद्दौला हारा और मीर जाफ़र कंपनी-समर्थित नवाब बना। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1760 | वांडीवाश का युद्ध भारत में फ़्रांसीसी शक्ति टूट गई। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1761 | पानीपत का तीसरा युद्ध अहमद शाह दुर्रानी ने मराठों को कुचल दिया और उनका उत्तर की ओर विस्तार रुक गया। |
मराठा साम्राज्य |
| 1764 | बक्सर का युद्ध कंपनी ने मीर क़ासिम, शुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय को एक साथ हराया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1765 | बंगाल की दीवानी प्रदान कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा में राजस्व वसूलने का अधिकार मिला। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1767 | प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध | मैसूर राज्य |
| 1768 | पृथ्वी नारायण शाह ने काठमांडू जीता काठमांडू एकीकृत नेपाल की राजधानी बना। |
नेपाल राज्य — विस्तार काल |
| 1769 | मद्रास की संधि जीते हुए प्रदेश परस्पर लौटाकर प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध समाप्त हुआ। |
मैसूर राज्य |
| 1770 | बंगाल का महान अकाल | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1773 | रेग्युलेटिंग एक्ट; वॉरेन हेस्टिंग्स गवर्नर-जनरल | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1775 | प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का आरंभ | मराठा साम्राज्य |
| 1780 | पोल्लिलूर का युद्ध हैदर अली और टीपू सुल्तान ने कर्नल बेली की कंपनी सेना नष्ट कर दी। |
मैसूर राज्य |
| 1782 | सालबाई की संधि प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध पूर्व स्थिति की बहाली के साथ समाप्त हुआ। |
सिंधिया राज्य (ग्वालियर) |
| 1784 | एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1784 | मंगलौर की संधि परस्पर वापसी के आधार पर द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध समाप्त हुआ। |
मैसूर राज्य |
| 1792 | श्रीरंगपट्टनम की संधि टीपू सुल्तान ने आधा राज्य सौंपा और दो पुत्र बंधक के रूप में दिए। |
मैसूर राज्य |
| 1793 | बंगाल का स्थायी बंदोबस्त | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1795 | खरदा का युद्ध मराठों ने हैदराबाद के निज़ाम को हराया। |
मराठा साम्राज्य |
| 1796 | अंग्रेज़ों ने डचों से तटीय सीलोन लिया तटीय श्रीलंका ब्रिटेन को मिला, जिसकी पुष्टि अमीएँ की संधि से हुई। |
ब्रिटिश सीलोन |
| 1798 | हैदराबाद ने सहायक संधि स्वीकार की निज़ाम वेलेज़ली की व्यवस्था स्वीकार करने वाला पहला शासक बना। |
हैदराबाद राज्य (निज़ाम) |
| 1799 | श्रीरंगपट्टनम का पतन टीपू सुल्तान मारा गया और वोडेयारों को कंपनी के सहयोगी के रूप में बहाल किया गया। |
मैसूर राज्य |
| 1799 | रणजीत सिंह ने लाहौर जीता | सिख साम्राज्य |
| 1802 | बसई की संधि पेशवा बाजीराव द्वितीय ने सहायक संधि स्वीकार की। |
मराठा साम्राज्य |
| 1803 | अंग्रेज़ों ने दिल्ली जीती मुग़ल बादशाह ब्रिटिश संरक्षण में आ गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1803 | असाये का युद्ध आर्थर वेलेज़ली ने सिंधिया और भोंसले की संयुक्त सेनाओं को हराया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1806 | वेल्लोर विद्रोह | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1809 | अमृतसर की संधि से सतलुज सीमा तय रणजीत सिंह ने सतलुज के दक्षिण में विस्तार न करने की सहमति दी। |
सिख साम्राज्य |
| 1814 | आंग्ल-नेपाल युद्ध: नालापानी की घेराबंदी बलभद्र कुँवर के नेतृत्व में गोरखा दुर्ग-सेना पीछे हटने से पहले डटी रही। |
नेपाल राज्य — विस्तार काल |
| 1815 | कैंडी समझौता कैंडी राज्य समाप्त हुआ और पूरा श्रीलंका ब्रिटिश शासन में आ गया। |
कैंडी राज्य |
| 1816 | सुगौली की संधि नेपाल ने कुमाऊँ, गढ़वाल और तराई सौंपी और ब्रिटिश रेज़िडेंट स्वीकार किया। |
नेपाल राज्य |
| 1817 | खड़की का युद्ध पुणे के पास पेशवा की सेना हारी। |
मराठा साम्राज्य |
| 1818 | तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त पेशवा के प्रदेश मिला लिए गए और कंपनी सर्वोच्च शक्ति बन गई। |
मराठा साम्राज्य |
| 1824 | कंपनी के विरुद्ध कित्तूर विद्रोह रानी चेन्नम्मा ने आरंभिक जीत पाई, पर दूसरे हमले में बंदी बना ली गईं। |
|
| 1826 | यांडाबो की संधि बर्मा ने असम, मणिपुर, अराकान और तेनासरिम कंपनी को सौंप दिए। |
अहोम राज्य |
| 1828 | ब्रह्म समाज की स्थापना | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1829 | सती प्रथा का उन्मूलन | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1835 | अंग्रेज़ी शिक्षा अधिनियम | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1839 | महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु | सिख साम्राज्य |
| 1839 | प्रथम आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध का आरंभ शाह शुजा को काबुल की गद्दी पर बैठाया गया, पर 1842 में ब्रिटिश सेना नष्ट हो गई। |
अफ़ग़ानिस्तान अमीरात |
| 1842 | काबुल से ब्रिटिश वापसी पीछे हटती लगभग पूरी ब्रिटिश टुकड़ी का सफ़ाया हो गया। |
अफ़ग़ानिस्तान अमीरात |
| 1843 | सिंध का विलय मियानी के युद्ध के बाद सिंध मिला लिया गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1845 | प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध सिखों ने जालंधर दोआब सौंपा और हर्जाना दिया। |
सिख साम्राज्य |
| 1846 | गुलाब सिंह को जम्मू-कश्मीर सौंपा गया डोगरा शासित जम्मू-कश्मीर रियासत बनी। |
|
| 1846 | कोत पर्व; नेपाल में राणा शासन का आरंभ जंग बहादुर राणा ने सत्ता हथियाई और राणा प्रधानमंत्रियों ने 104 वर्ष शासन किया। |
नेपाल राज्य |
| 1848 | सतारा पर व्यपगत का सिद्धांत लागू शासक की बिना प्राकृतिक उत्तराधिकारी के मृत्यु होने पर सतारा मिला लिया गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1849 | पंजाब का विलय सिख साम्राज्य समाप्त हुआ और महाराजा दलीप सिंह को पेंशन देकर हटा दिया गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1853 | पहली यात्री रेल: बंबई से ठाणे | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1855 | संथाल हूल (विद्रोह) 1856 में दबा दिया गया; संथाल परगना ज़िला बनाया गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1856 | अवध का विलय कुशासन के आरोप में वाजिद अली शाह को पदच्युत कर दिया गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1856 | हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम हिंदू विधवाओं का पुनर्विवाह वैध हुआ। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1857 | मेरठ से 1857 के विद्रोह का आरंभ 1858 तक विद्रोह दबा दिया गया और कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया। |
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| 1857 | बैरकपुर में मंगल पांडे का हमला मंगल पांडे को फाँसी दी गई; उनकी रेजिमेंट भंग कर दी गई। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1857 | विद्रोहियों ने बहादुर शाह ज़फ़र को बादशाह घोषित किया सितंबर 1857 में फिर क़ब्ज़े तक दिल्ली विद्रोह का केंद्र रही। |
गोरखा एकीकरण से गणराज्य तक नेपाल का संक्षिप्त, विश्वसनीय इतिहास।
हड़प्पा, विजयनगर, मुग़ल दरबार और 1857 पर स्रोत-आधारित अध्याय — UPSC के लिए अनिवार्य।
सल्तनत, मुग़लों और क्षेत्रीय राज्यों पर सबसे भरोसेमंद एक-खंडीय पुस्तक।
उन पाठकों के लिए विस्तृत दो-खंडीय विवेचन जो एक-खंडीय पाठ्यपुस्तक से आगे पढ़ना चाहते हैं।
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