📖 शब्दावली
भारतीय इतिहास के मुख्य शब्द
42 शब्द जो पाठ्यपुस्तकों और परीक्षाओं में बार-बार आते हैं — हर एक अपने NCERT अध्याय से समझाया गया, वहाँ पढ़ने के लिंक के साथ।
- आलवार और नायनार (Alvars and Nayanars)
- तमिलनाडु के सबसे आरंभिक भक्ति आंदोलनों (लगभग छठी सदी) के नेता — विष्णु और शिव के भक्त — जो तमिल में भजन गाते थे।
- अमर-नायक (Amara-nayaka)
- विजयनगर के सैन्य सेनापति जो क्षेत्रों पर शासन करते और कर वसूलते थे; यह व्यवस्था संभवतः दिल्ली सल्तनत की इक्ता व्यवस्था से ली गई।
- चैत्य (Chaitya)
- उपासना-कक्ष; अर्धवृत्ताकार, मेहराबदार छत वाले शैलकृत चैत्य अजंता, पितलखोरा और भाजा में मिलते हैं।
- दामिन-इ-कोह (Damin-i-Koh)
- राजमहल की पहाड़ियों में 1832 तक संथालों के लिए सीमांकित भूमि, जहाँ उन्हें हल से खेती करने वाले स्थायी किसान बनना था।
- दरगाह (Dargah)
- किसी सूफ़ी शेख़ का मक़बरा-तीर्थ (फ़ारसी शब्द, अर्थ ‘दरबार’), जो भक्ति और तीर्थयात्रा का केंद्र बना।
- धम्म महामात्र (Dhamma mahamatta)
- अशोक द्वारा धम्म का संदेश फैलाने के लिए नियुक्त विशेष अधिकारी।
- धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र (Dharmasutras and Dharmashastras)
- लगभग 500 ई.पू. से सामाजिक मानदंड बताने वाले संस्कृत ग्रंथ; इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण मनुस्मृति है।
- अभिलेखशास्त्र (Epigraphy)
- अभिलेखों का अध्ययन।
- गोत्र (Gotra)
- लोगों को वर्गीकृत करने की ब्राह्मणीय पद्धति (लगभग 1000 ई.पू. से); हर गोत्र किसी वैदिक ऋषि के नाम पर; एक ही गोत्र के लोग विवाह नहीं कर सकते थे।
- विलय-पत्र (Instrument of Accession)
- वह दस्तावेज़ जिसके द्वारा किसी रियासत के शासक ने भारतीय संघ का हिस्सा बनना स्वीकार किया।
- जागीर (Jagir)
- राजस्व का अधिकार — अधिकांश मुग़ल मनसबदारों को इसी रूप में वेतन मिलता था।
- जंगल (Jangal)
- घना वन — मुग़ल काल में पूर्वी, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के विशाल भूभाग इससे या झाड़ीदार भूमि (खरबंदी) से ढके थे।
- जाति (Jati)
- सामाजिक श्रेणियों के लिए एक और शब्द: वर्ण चार थे, पर जातियों की संख्या तय नहीं थी और बढ़ती रही।
- झूम खेती (Jhum cultivation)
- वनों के छोटे टुकड़ों पर स्थानांतरी खेती, जिसमें पेड़ों के ऊपरी भाग काटकर और वनस्पति जलाकर ज़मीन साफ़ की जाती है।
- ख़ानक़ाह (Khanqah)
- सूफ़ी आश्रय-स्थल, जिसका संचालन एक शिक्षक-गुरु (शेख़, पीर या मुर्शिद) करता था और जिसके इर्द-गिर्द सूफ़ी समुदाय संगठित होते थे।
- भाषाई राज्य (Linguistic states)
- भाषाओं की सीमाओं के अनुसार बनाए गए राज्य, राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिश पर — 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम का आधार।
- लुप्त-मोम ढलाई (Lost-wax casting (cire-perdu))
- धातु प्रतिमाएँ ढालने की विधि, सिंधु घाटी से ज्ञात — मोहनजोदड़ो की ‘नर्तकी’ इसी तरह बनी।
- महाजनपद (Mahajanapadas)
- छठी सदी ई.पू. के सोलह आरंभिक राज्य — आरंभिक राज्यों, नगरों, लोहे और पहले सिक्कों का युग।
- महालवाड़ी (Mahalwari)
- राजस्व व्यवस्था (1822 से) जिसमें राजस्व गाँव-गाँव (महाल) के हिसाब से तय होता और मुखिया वसूलता था।
- मनसबदारी (Mansabdari)
- मुग़लों की सैन्य-सह-प्रशासनिक पद (मनसब) व्यवस्था, जो नागरिक और सैन्य मामले चलाती थी।
- नागर, द्रविड़ और वेसर (Nagara, Dravida and Vesara)
- हिंदू मंदिरों की दो प्रमुख शैलियाँ — उत्तर में नागर, दक्षिण में द्रविड़ — और वेसर, जो दोनों का मेल है।
- मुद्राशास्त्र (Numismatics)
- सिक्कों का अध्ययन — उनकी लिपि और चित्र, धातु, और वे कहाँ मिले।
- उद्देश्य प्रस्ताव (Objectives Resolution)
- संविधान सभा में 13 दिसंबर 1946 को नेहरू द्वारा रखा गया प्रस्ताव, जिसमें संविधान की दृष्टि रखी गई।
- पेरिप्लस (Periplus)
- यूनानी शब्द, अर्थ ‘चारों ओर नौकायन’ — एक अज्ञात यूनानी नाविक का ‘पेरिप्लस ऑफ़ द एरिथ्रियन सी’ भारत के तटों के व्यापार का वर्णन करता है।
- स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement)
- 1793 से ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के हर ज़मींदार का राजस्व तय किया; न चुकाने वालों की ज़मींदारियाँ नीलाम होती थीं।
- पेशकश (Peshkash)
- मुग़ल राज्य द्वारा वसूला जाने वाला एक प्रकार का नज़राना।
- पच्चीकारी (पिएत्रा ड्यूरा) (Pietra dura)
- इंडो-इस्लामी इमारतों की दीवारों को सजाने के लिए रंगीन पत्थरों की जड़ाई, मोज़ेक, सुलेख और जालियों के साथ।
- प्रशस्ति (Prashasti)
- किसी राजा या संरक्षक की प्रशंसा में कवि की रचना — जैसे समुद्रगुप्त के लिए हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति।
- पूर्ण स्वराज (Purna Swaraj)
- पूर्ण स्वतंत्रता — कांग्रेस का घोषित लक्ष्य; ‘स्वतंत्रता दिवस’ पहली बार 26 जनवरी 1930 को मनाया गया।
- रैयत (Raiyat)
- मुग़लकालीन हिंद-फ़ारसी स्रोतों में किसान के लिए सबसे अधिक प्रयुक्त शब्द।
- रिहला (Rihla)
- इब्न बतूता का अरबी में लिखा यात्रा-वृत्तांत, जिसमें चौदहवीं सदी के उपमहाद्वीप के जीवन का विस्तृत वर्णन है।
- रैयतवाड़ी (Ryotwari)
- राजस्व व्यवस्था, जैसे बंबई दक्कन में, जिसमें राजस्व सीधे रैयत (किसान) से तय होता था।
- संगम साहित्य (Sangam literature)
- आरंभिक तमिल कविताओं के संकलन (लगभग पहली सदी ई.), जैसे पुरनानूरु, जिनमें सरदारों, चारणों और ग्राम-जीवन का वर्णन है।
- संघ (Sangha)
- बौद्ध भिक्षु संघ; इसके नियम विनय पिटक में हैं।
- सत्याग्रह (Satyagraha)
- अहिंसक प्रतिरोध की पद्धति, जिसे महात्मा गांधी ने सबसे पहले दक्षिण अफ़्रीका में विकसित किया।
- श्रेणी (Shreni)
- शिल्पकारों और व्यापारियों की श्रेणी, जो संभवतः कच्चा माल जुटाती, उत्पादन नियंत्रित करती और माल बेचती थी।
- सहायक संधि (Subsidiary Alliance)
- ऐसी संधि जिसके तहत शासक अपनी सेना भंग करता, अपने राज्य में ब्रिटिश सेना रखने देता और ब्रिटिश रेज़िडेंट की सलाह पर चलता — 1801 में अवध पर थोपी गई।
- त्रिपिटक (Tipitaka)
- बौद्ध ग्रंथों की ‘तीन टोकरियाँ’, पहले मौखिक रूप से, फिर लिखित।
- संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ (Union, State and Concurrent lists)
- संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच विषयों को बाँटने वाली तीन सूचियाँ; अन्य संघों की तुलना में अधिक विषय केंद्र के अधीन रखे गए।
- वचन (Vachana)
- वीरशैव (लिंगायत) परंपरा की भक्ति-रचना, जैसे बसवन्ना के वचन जो खोखले कर्मकांड पर प्रश्न उठाते हैं।
- वर्ण (Varna)
- धर्मसूत्रों और धर्मशास्त्रों में वर्णित समाज की चार श्रेणियाँ, हर एक के निर्धारित व्यवसाय।
- ज़मींदार (Zamindar)
- ग्रामीण प्रभावशाली व्यक्ति: आइन-ए-अकबरी बताती है कि मुग़ल राज्य ज़मींदारों से अपने संबंध कैसे नियंत्रित करता था।
कोई शब्द मेल नहीं खाता।
हम कैसे जाँचते हैं: हर व्याख्या जुड़े हुए NCERT अध्याय के किसी अंश से लिखी गई है, और जब तक उस अंश के मुख्य वाक्यांश अध्याय के अपने पाठ में न मिलें, हमारा बिल्ड विफल होता है।