🔬 भारत में विज्ञान

भारत में विज्ञान के 5,000 वर्ष

हड़प्पा के काँसे और नियोजित नालियों से शून्य, केरल स्कूल, रमन प्रभाव और चंद्र अभियानों तक — भारत में जो खोजा, आविष्कृत और निर्मित हुआ, उसकी एक समयरेखा। हर उपलब्धि अपने स्रोत से जुड़ी है।

उपलब्धियाँ111
क्षेत्र13
वैज्ञानिक और विद्वान21
प्राचीन और शास्त्रीय योगदानक्षेत्रवार, मानचित्र के साथ, और वे विचार जिनकी तिथि NCERT नहीं देता → आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियाँखोजें, नोबेल पुरस्कार और NCERT में परिचित कराए गए वैज्ञानिक → अंतरिक्ष, परमाणु और प्रौद्योगिकी उपलब्धियाँउपग्रह, रिएक्टर, सुपरकंप्यूटर और रेलवे, आधिकारिक तिथियों के साथ →

ज्ञान के क्षेत्र

गणित 19 उपलब्धियाँ मानक बाट → भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना खगोल विज्ञान 11 उपलब्धियाँ छाया-घड़ी और जल-घड़ी → हानले डार्क स्काई रिज़र्व चिकित्सा और जीव विज्ञान 6 उपलब्धियाँ सबसे पुरानी दंत-चिकित्सा → पोषण विज्ञान पर आधारित मध्याह्न भोजन कार्यक्रम भाषा, लेखन और शिक्षा 7 उपलब्धियाँ हड़प्पा लिपि → भारतीय विज्ञान संस्थान की स्थापना धातुएँ और पदार्थ 11 उपलब्धियाँ अत्तिरमपक्कम के पत्थर के हस्त-कुठार → जमशेदपुर का इस्पात अभियांत्रिकी, जल और नगर 13 उपलब्धियाँ नियोजित जल-निकास → वंदे भारत ट्रेनें कृषि और वनस्पति 7 उपलब्धियाँ मेहरगढ़ में खेती का आरंभ → श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ़्लड) भौतिकी 5 उपलब्धियाँ बिजली की रोशनी का आगमन → सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर को नोबेल पुरस्कार परमाणु विज्ञान 9 उपलब्धियाँ भारत के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत → पोखरण में परमाणु परीक्षण अंतरिक्ष 15 उपलब्धियाँ INCOSPAR: भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान की शुरुआत → चंद्रयान-3 चंद्रमा पर उतरा कंप्यूटिंग और संचार 6 उपलब्धियाँ पहला छापाखाना → यूपीआई: तुरंत डिजिटल भुगतान रसायन विज्ञान 1 उपलब्धियाँ पी.सी. राय ने भारत की पहली दवा कंपनी स्थापित की → पी.सी. राय ने भारत की पहली दवा कंपनी स्थापित की मौसम और पृथ्वी 1 उपलब्धियाँ भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना → भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना

समयरेखा

हड़प्पा और आरंभिक भारत

📜 क्षेत्र के अनुसार देखें →
  1. लगभग 15 लाख वर्ष पहले
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    अत्तिरमपक्कम के पत्थर के हस्त-कुठार

    📍 तमिलनाडु

    एश्यूलियन हस्त-कुठार और विदारणी — दक्षिण एशिया में आरंभिक मानवों के बनाए सबसे पुराने औज़ारों में से।

  2. लगभग 3,85,000–1,72,000 वर्ष पहले
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    छोटे, अधिक परिष्कृत पत्थर के औज़ार

    📍 अत्तिरमपक्कम, तमिलनाडु

    तैयार-कोर औज़ारों की मध्य पुरापाषाण संस्कृति — पहले माने गए समय से बहुत पहले।

  3. लगभग 7000 ई.पू. से
    🌾 कृषि और वनस्पति

    मेहरगढ़ में खेती का आरंभ

    📍 मेहरगढ़, बलूचिस्तान

    उपमहाद्वीप के सबसे पुराने कृषक गाँवों में से एक, जिसकी खुदाई और तिथि-निर्धारण फ़्रांसीसी पुरातत्वविदों ने किया।

  4. 7,500–9,000 वर्ष पहले
    🩺 चिकित्सा और जीव विज्ञान

    सबसे पुरानी दंत-चिकित्सा

    📍 मेहरगढ़, बलूचिस्तान

    नौ वयस्कों के ग्यारह दाढ़ों में जीवित रहते हुए — चकमक की नोक से — छेद किए गए थे।

  5. नवपाषाण काल
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    आरंभिक कपास

    📍 मेहरगढ़, बलूचिस्तान

    ताँबे के एक मनके के भीतर सुरक्षित कपास के रेशे — नवपाषाणकालीन मेहरगढ़ में कपास का पहला प्रमाण।

  6. आरंभिक हड़प्पा
    🌾 कृषि और वनस्पति

    जुता हुआ खेत और मिट्टी के हल

    📍 कालीबंगा, राजस्थान

    समकोण पर दो तरह की हल-रेखाओं वाला खेत — दो फ़सलें साथ उगाई जाती थीं; मिट्टी के हल के नमूने चोलिस्तान और बनावली में मिले।

  7. हड़प्पा काल
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    ताँबा और काँसा धातुकर्म

    📍 हड़प्पा के नगर

    हड़प्पा सभ्यता ने ताँबे और काँसे के धातुकर्म में महारत हासिल की — वह तकनीक जिससे उसके नगर संभव हुए।

  8. हड़प्पा सभ्यता
    📜 भाषा, लेखन और शिक्षा

    हड़प्पा लिपि

    📍 हड़प्पा नगर

    मुहरों पर छोटे अभिलेख — लगभग 375 से 400 चिह्न, सबसे लंबा लगभग 26 चिह्नों का। लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है।

  9. हड़प्पा सभ्यता
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    नियोजित जल-निकास

    📍 मोहनजोदड़ो, हड़प्पा और अन्य नगर

    हड़प्पा नगरों में नियोजित जल-निकास व्यवस्था — नगर-नियोजन का प्रमाण।

  10. हड़प्पा काल
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    मानक अनुपात की ईंटें

    📍 हड़प्पा की बस्तियाँ

    धूप में सुखाई हों या पकाई, हड़प्पा की ईंटों का एक ही अनुपात था — लंबाई ऊँचाई की चार गुनी और चौड़ाई दो गुनी — और ये सभी हड़प्पा बस्तियों में प्रयुक्त हुईं; यह संकेत है कि नगर पहले नियोजित हुए, फिर बने।

  11. लगभग 2500 ई.पू.
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    लुप्त-मोम विधि से काँसे की ढलाई

    📍 मोहनजोदड़ो

    ‘लुप्त-मोम’ (सिरे-पर्दू) ढलाई की विधि सिंधु घाटी संस्कृति के समय ही सीख ली गई थी; मोहनजोदड़ो की ‘नर्तकी’ संभवतः सबसे पुरानी काँस्य प्रतिमा है, जो 2500 ई.पू. की है। जनजातीय शिल्पी आज भी यह विधि अपनाते हैं।

  12. हड़प्पा सभ्यता
    ➗ गणित

    मानक बाट

    📍 हड़प्पा नगर

    बाटों की सटीक व्यवस्था, प्रायः चर्ट नामक पत्थर के घनाकार बाट, व्यापार को नियंत्रित करती थी।

  13. हड़प्पा काल
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    कठोर पत्थर के मनकों में छेद

    📍 चन्हुदड़ो, लोथल, धोलावीरा

    कार्नेलियन और अन्य पत्थरों के मनकों को आकार देकर घिसा, चमकाया और छेदा जाता था; चन्हुदड़ो, लोथल और धोलावीरा में विशेष बरमे मिले हैं।

  14. हड़प्पा काल
    ➗ गणित

    पैमाने और लंबाई की इकाइयाँ

    📍 हड़प्पा स्थल

    हड़प्पा स्थलों से चिह्नित रेखाओं वाली वस्तुएँ मिली हैं जो पैमाने हो सकती हैं। बाद का भारतीय साहित्य अंगुल (उँगली की चौड़ाई), धनुष और योजन जैसी इकाइयाँ बताता है, जो वस्तुओं, स्थापत्य और नगर नियोजन में काम आती थीं — बढ़ई और दर्ज़ी आज भी अंगुल का उपयोग करते हैं।

  15. हड़प्पा सभ्यता
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    पहिया: मिट्टी की गाड़ियाँ

    📍 हड़प्पा स्थल

    पहियों वाली गाड़ियों के मिट्टी के नमूने हड़प्पा काल में पहियेदार परिवहन दिखाते हैं।

  16. हड़प्पा काल
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    लोथल का गोदीबाड़ा

    📍 लोथल, गुजरात

    हड़प्पाई बस्ती लोथल में ईंटों का एक विशाल बेसिन, जिसे NCERT व्यापार से जुड़ा गोदीबाड़ा बताता है।

  17. लगभग 3000–1500 ई.पू.
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    धोलावीरा का जल-प्रबंधन

    📍 धोलावीरा, गुजरात

    एक उन्नत जल-प्रबंधन व्यवस्था ने सूखे द्वीप पर एक परकोटा-बंद नगर को फलने-फूलने दिया।

  18. 1800–1000 ई.पू.
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    गंगा के मैदान में लोहे का काम

    📍 उत्तर प्रदेश

    1800 से 1000 ई.पू. के बीच रेडियोकार्बन-तिथि वाली परतों में लोहे की वस्तुएँ, भट्टियाँ, धौंकनी-नलियाँ और धातुमल।

  19. वैदिक काल
    ➗ गणित

    वेदों में संख्या-नाम और भिन्न

    यजुर्वेद संहिता दस की घातों के नाम गिनाती है — एक, दश, शत, सहस्र, अयुत और आगे 10¹² तक; ऋग्वेद तीन-चौथाई भिन्न को त्रि-पाद कहता है।

  20. लगभग 800 ई.पू. (बौधायन)
    ➗ गणित

    शुल्बसूत्र: रस्सी से ज्यामिति

    वैदिक काल के अग्नि-वेदी निर्माण पर ज्यामितीय ग्रंथ — लंब और लंब-समद्विभाजक बनाने की विधियों वाले सबसे पुराने ज्ञात भारतीय ग्रंथ, जिनमें रस्सी परकार का काम करती है। बौधायन शुल्बसूत्र (लगभग 800 ई.पू.) में भिन्नों के साथ गणना मिलती है।

प्राचीन और शास्त्रीय काल

📜 क्षेत्र के अनुसार देखें →
  1. लगभग 600–500 ई.पू.
    🌾 कृषि और वनस्पति

    धान की रोपाई

    📍 गंगा घाटी

    गंगा घाटी में धान की रोपाई फैली — साथ ही नगरों का विकास हुआ।

  2. लगभग 500 ई.पू.
    📜 भाषा, लेखन और शिक्षा

    पाणिनि की अष्टाध्यायी

    पाणिनि की अष्टाध्यायी, संस्कृत व्याकरण का ग्रंथ।

  3. मौर्य काल
    📜 भाषा, लेखन और शिक्षा

    तक्षशिला, शिक्षा का केंद्र

    📍 तक्षशिला

    बौद्ध ग्रंथों के अनुसार कौटिल्य — ‘शासन और अर्थ का शास्त्र’ अर्थशास्त्र के रचयिता — विश्व-प्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय में शिक्षक थे।

  4. तीसरी सदी ई.पू.
    📜 भाषा, लेखन और शिक्षा

    ब्राह्मी: अशोक के अभिलेख

    📍 पूरे मौर्य साम्राज्य में

    ब्राह्मी लिपि में उकेरे गए अभिलेख — जिन्हें जेम्स प्रिंसेप ने 1838 में ही पढ़ा।

  5. प्राचीन और मध्यकाल
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    वुट्ज़ इस्पात

    📍 दक्षिण भारत

    प्रसिद्ध 'वुट्ज़': दक्षिण भारत में क्रूसिबल में बनाया गया उच्च-कार्बन इस्पात।

  6. दूसरी शताब्दी ई.पू. – तीसरी शताब्दी ई.
    🔭 खगोल विज्ञान

    छाया-घड़ी और जल-घड़ी

    छाया से समय मापने का सबसे पुराना उल्लेख कौटिल्य के अर्थशास्त्र में है, जिसमें बहते पानी वाली जल-घड़ी का भी वर्णन है।

  7. लगभग 100 ई.; गुप्त काल में अंतिम रूप
    🩺 चिकित्सा और जीव विज्ञान

    चरक और सुश्रुत संहिता

    संस्कृत में चिकित्सा के ग्रंथ। आयुर्वेद की जड़ें कहीं पुरानी हैं, पर ये ग्रंथ — जिनमें रोगों का वर्गीकरण और निदान भी है — गुप्त काल में संकलित होकर अंतिम रूप में आए।

  8. करिकाल का शासनकाल
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    कल्लणै (ग्रैंड एनीकट)

    📍 कावेरी, श्रीरंगम के नीचे

    चोल राजा करिकाल का बनाया एक जटिल जल-मोड़ तंत्र, श्रीरंगम द्वीप के ठीक नीचे, जो कावेरी का पानी डेल्टा के मध्य और दक्षिणी भागों तक पहुँचाता था ताकि अधिक भूमि सींची जा सके।

  9. लगभग दूसरी शताब्दी ई.
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    सुदर्शन झील, एक जलाशय

    📍 गिरनार, गुजरात

    एक कृत्रिम जलाशय, जिसके बारे में शक शासक रुद्रदामन की उपलब्धियाँ दर्ज करने वाले संस्कृत शिलालेख से पता चलता है; रुद्रदामन ने इसका पुनर्निर्माण कराया।

  10. तीसरी या चौथी सदी ई. तक पुराना
    ➗ गणित

    शून्य: बख्शाली पांडुलिपि

    📍 बख्शाली (अब पाकिस्तान में)

    बिंदु के रूप में लिखे सैकड़ों शून्यों वाला गणित-ग्रंथ — आज के शून्य-चिह्न का सबसे पुराना दर्ज स्रोत।

  11. तीसरी सदी ई.पू. – तेरहवीं सदी ई.
    📜 भाषा, लेखन और शिक्षा

    नालंदा महाविहार

    📍 नालंदा, बिहार

    भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय, जहाँ लगभग 800 वर्षों तक निरंतर शिक्षा चली।

  12. प्राचीन काल
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    जंग-रोधी लौह स्तंभ

    📍 दिल्ली

    एक प्राचीन लौह स्तंभ जिस पर सदियों से जंग नहीं लगा — धातुविज्ञानियों ने इसका रहस्य समझाया।

  13. लगभग 500 ई.
    🔭 खगोल विज्ञान

    आर्यभट और आर्यभटीय

    📍 कुसुमपुर (पटना के पास)

    गणित और खगोल का एक छोटा ग्रंथ। आर्यभट ने कहा कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, वर्ष की लंबाई आधुनिक मान से कुछ ही मिनट के अंतर पर बताई, पृथ्वी के आकार का अनुमान लगाया और सूर्य व चंद्र ग्रहण की सही व्याख्या की। पृथ्वी के एक घूर्णन का उनका मान लगभग 23 घंटे 56 मिनट 4.1 सेकंड है।

  14. 499 ई.
    ➗ गणित

    आर्यभट और दस अंकों से गणना

    आर्यभट पहले गणितज्ञ थे जिन्होंने दस प्रतीकों की भारतीय पद्धति को पूरी तरह समझाया और उससे विस्तृत वैज्ञानिक गणनाएँ कीं; उन्होंने एक अज्ञात वाले प्रश्न हल करने की व्यवस्थित विधि भी पहली बार दी।

  15. आर्यभट का समय
    🔭 खगोल विज्ञान

    घटिका-यंत्र (डूबते कटोरे की जल-घड़ी)

    बहते पानी वाली घड़ियाँ पानी घटने पर धीमी हो जाती थीं, इसलिए डूबते कटोरे की जल-घड़ी बनी — जिसका पहला उल्लेख आर्यभट ने किया। इससे विहारों, महलों और चौराहों पर समय रखा जाता था और हर बार कटोरा डूबने की घोषणा होती थी; दिन को 60 घटियों में बाँटा गया।

  16. गुप्त काल
    🔭 खगोल विज्ञान

    वराहमिहिर की बृहत्संहिता

    📍 उज्जयिनी (उज्जैन)

    एक विश्वकोशीय ग्रंथ जिसमें खगोल और ज्योतिष, मौसम का पूर्वानुमान, वास्तु, नगर नियोजन और खेती तक शामिल हैं।

  17. लगभग 530 ई.
    🔭 खगोल विज्ञान

    छड़ी की छाया से समय

    वराहमिहिर ने एक खड़ी छड़ी की छाया से समय निकालने का सटीक सूत्र दिया।

  18. जन्म 598 ई.
    ➗ गणित

    ब्रह्मगुप्त: शून्य के नियम

    📍 भिल्लमाल

    ब्रह्मस्फुटसिद्धांत में उन्होंने शून्य, ऋणात्मक संख्याओं और भिन्नों के साथ अंकगणित के नियम दिए। उनकी रचनाएँ बाद में फ़ारसी और लैटिन में अनूदित हुईं।

  19. 6वीं–10वीं शताब्दी
    ➗ गणित

    भास्कर प्रथम और त्रिकोणमिति

    भास्कर प्रथम ने त्रिकोणमिति में अग्रणी कार्य किया और आर्यभटीय पर विस्तृत टीका लिखी।

  20. 628 ई.
    ➗ गणित

    ब्रह्मगुप्त के भिन्न-नियम

    ब्रह्मस्फुटसिद्धांत ने भिन्नों को जोड़ने, घटाने, गुणा और भाग करने की विधि पहली बार सामान्य रूप में बताई — वही विधियाँ आज भी पढ़ाई जाती हैं। ये विचार अरबों के माध्यम से यूरोप पहुँचे।

  21. लगभग 700 ई.
    ➗ गणित

    विरहांक संख्याएँ

    कविता में लघु और गुरु मात्राओं की लयों को गिनते हुए प्राकृत विद्वान विरहांक ने 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21… अनुक्रम का नियम दिया — इसे लिखने वाले पहले ज्ञात व्यक्ति। आज इसे विरहांक–फ़िबोनाची अनुक्रम कहते हुए जाना जाता है।

  22. 8वीं शताब्दी का अंत
    📜 भाषा, लेखन और शिक्षा

    विक्रमशिला विश्वविद्यालय

    📍 गंगा तट, बिहार

    पाल राजा धर्मपाल द्वारा स्थापित, यह चार सौ से अधिक वर्षों तक शिक्षा का बड़ा केंद्र रहा — छह महाविद्यालय, विशाल पुस्तकालय और लगभग 3,000 विद्वान। हर महाविद्यालय में प्रवेश-परीक्षा लेने वाला ‘द्वारपंडित’ होता था।

  23. 9वीं शताब्दी
    ➗ गणित

    भारतीय अंक अरब जगत पहुँचे

    📍 बग़दाद

    गणित, खगोल और चिकित्सा के संस्कृत ग्रंथ अरबी में अनूदित हुए। अरबों ने शून्य सहित भारत की दशमलव अंक-पद्धति अपनाई; यूरोप में ये ‘अरबी अंक’ कहलाए।

  24. लगभग 825 ई.
    ➗ गणित

    अल-ख़्वारिज़्मी और ‘हिंदू अंक’

    📍 बग़दाद

    भारतीय अंक-पद्धति लगभग 800 ई. तक अरब जगत पहुँची और वहाँ अल-ख़्वारिज़्मी की पुस्तक ‘हिंदू अंकों से गणना’ (लगभग 825) तथा अल-किंदी की ‘हिंदू अंकों का उपयोग’ (लगभग 830) से लोकप्रिय हुई।

  25. लगभग 850 ई.
    ➗ गणित

    महावीराचार्य का गणितसारसंग्रह

    महावीराचार्य ने भिन्नों के अंकगणित को आगे बढ़ाया और गणितसारसंग्रह में दस की घातों के नाम 10²³ तक दिए।

  26. 10वीं शताब्दी
    ➗ गणित

    चौंतीसा यंत्र — जादुई वर्ग

    📍 खजुराहो

    पहला दर्ज 4 × 4 जादुई वर्ग, पार्श्वनाथ जैन मंदिर के एक अभिलेख में: हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग 34 है।

  27. लगभग 10वीं शताब्दी ई.
    🌾 कृषि और वनस्पति

    सुरपाल का वृक्षायुर्वेद

    वनस्पति विज्ञान का ग्रंथ: किस मिट्टी में कौन-से पौधे, बीज-संग्रह और उपचार, प्रजाति व ऋतु के अनुसार सिंचाई, और प्राकृतिक कीट-नियंत्रण।

  28. 11वीं शताब्दी
    🔭 खगोल विज्ञान

    अल-बिरूनी ने भारतीय विज्ञान का अध्ययन किया

    📍 ग़ज़नी

    अल-बिरूनी ने संस्कृत सीखी और भारत का विश्वकोशीय सर्वेक्षण लिखा; गणित और खगोल में उन्होंने आर्यभट, वराहमिहिर और ब्रह्मगुप्त की रचनाओं से जो मिला, उसे संकलित किया।

  29. ग्यारहवीं सदी
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    बावड़ियाँ: रानी की वाव

    📍 पाटन, गुजरात

    भारत में तीसरी सहस्राब्दी ई.पू. से बावड़ियाँ भूमिगत जल सहेजती रहीं; यह उस कला की उत्कृष्ट कृति है।

  30. जन्म 1114
    ➗ गणित

    भास्कराचार्य की लीलावती

    📍 संभवतः आज का महाराष्ट्र

    भारत के महानतम गणितज्ञों और खगोलविदों में से एक: लीलावती (1150 ई.) पहेलियों से गणित सिखाती है, बीजगणित उन्नत बीजगणित पर है और सिद्धांतशिरोमणि खगोलीय गणना पर। उनकी कई रचनाएँ मुग़ल काल में फ़ारसी में अनूदित हुईं।

  31. भास्कर द्वितीय का समय
    🔭 खगोल विज्ञान

    जल-पात्रों में आकाश-दर्शन

    800 से अधिक वर्ष पहले खगोलविद उथले जल-पात्रों में तारों और ग्रहों के प्रतिबिंब को सही कोण पर रखी नलियों से देखकर उनकी स्थिति मापते थे।

मध्यकाल और आरंभिक आधुनिक काल

📜 क्षेत्र के अनुसार देखें →
  1. लगभग 1200
    ➗ गणित

    भारतीय अंक यूरोप पहुँचे

    अरब जगत से ये अंक लगभग 1100 ई. तक यूरोप और अफ़्रीका के कुछ भागों में पहुँचे; लगभग 1200 में इतालवी गणितज्ञ फ़िबोनाची ने यूरोप से इन्हें अपनाने का आग्रह किया। अरब विद्वान इन्हें ‘हिंदू अंक’ कहते थे।

  2. 13वीं–17वीं शताब्दी
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    आसवन से शुद्ध जस्ता

    शुद्ध जस्ते का उत्पादन अपने चरम पर पहुँचा, एक विशेष आसवन प्रक्रिया से — जो विश्व में पहली बार प्रयोग हुई।

  3. 14वीं शताब्दी
    ➗ गणित

    नारायण पंडित की गणितकौमुदी

    गणित का एक विशाल ग्रंथ जिसमें महत्वपूर्ण मौलिक विकास शामिल थे।

  4. 14वीं शताब्दी
    ➗ गणित

    माधव और केरल स्कूल

    📍 केरल

    माधव ने त्रिकोणमितीय फलनों का श्रेणी-विस्तार दिया — विश्व में पहली बार — और π का एक अनंत श्रेणी के रूप में सटीक मान। उन्हें और उनके अनुयायियों को केरल खगोल-गणित स्कूल के नाम से जाना जाता है।

  5. 1500
    🔭 खगोल विज्ञान

    नीलकंठ सोमयाजी का ग्रह-मॉडल

    📍 केरल

    केरल स्कूल के इस विद्वान ने एक ग्रह-मॉडल बनाया जिसमें बुध और शुक्र सूर्य की परिक्रमा करते थे।

  6. सितंबर 1556
    💻 कंप्यूटिंग और संचार

    पहला छापाखाना

    📍 पुराना गोवा

    जेसुइट मिशनरियों द्वारा सेंट पॉल कॉलेज में स्थापित — भारत का पहला छापाखाना।

  7. 1727
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    जयपुर, एक नियोजित नगर

    📍 जयपुर

    सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा नियुक्त विद्याधर भट्टाचार्य ने नए नगर को आयताकार खंडों के ग्रिड पर, दिशाओं के अनुरूप, चौड़ी सड़कों, बाग़ों और नौ चौकों के साथ बनाया।

  8. अठारहवीं सदी का आरंभ
    🔭 खगोल विज्ञान

    जंतर मंतर वेधशाला

    📍 जयपुर, राजस्थान

    नंगी आँखों से आकाश देखने के लिए पत्थर-चूने के लगभग 20 विशाल यंत्र।

  9. 1780
    💻 कंप्यूटिंग और संचार

    भारत का पहला मुद्रित समाचार-पत्र

    बंगाल गज़ट — NCERT की संचार-समयरेखा में भारत में मुद्रित समाचार की शुरुआत।

आधुनिक विज्ञान

🔬 आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियाँ →
  1. 16 अप्रैल 1853
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    पहली यात्री रेलगाड़ी

    📍 बंबई (मुंबई) – ठाणे

    भारत में रेल की शुरुआत बंबई और ठाणे के बीच एक यात्री रेलगाड़ी से हुई।

  2. 1875
    🌦 मौसम और पृथ्वी

    भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना

    1864 में कलकत्ता में विनाशकारी चक्रवात और 1866 व 1871 में मानसून की विफलता के बाद भारत सरकार ने सारा मौसम-कार्य एक केंद्रीय संस्था के अधीन किया। इसका ध्येय-वाक्य: ‘सूर्य से वर्षा उत्पन्न होती है।’

  3. 1879
    ⚛ भौतिकी

    बिजली की रोशनी का आगमन

    📍 कलकत्ता (कोलकाता)

    कलकत्ता में बिजली की रोशनी का प्रदर्शन हुआ — भारत में बिजली की शुरुआत।

  4. 1881
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे

    📍 दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल

    पहली पहाड़ी यात्री रेल, पर्वतीय भूभाग पर साहसिक इंजीनियरिंग के साथ।

  5. 1895
    ⚛ भौतिकी

    जे.सी. बोस ने बेतार संचरण दिखाया

    📍 कलकत्ता

    जगदीश चंद्र बोस ने मिलीमीटर-तरंगों से बेतार संचरण की पहल की; कलकत्ता में एक प्रयोग में उन्होंने दिखाया कि संकेत दीवार के पार जा सकते हैं।

  6. 1897
    ⚛ भौतिकी

    पहली व्यावसायिक बिजली: सिद्रापोंग

    📍 दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल

    130 किलोवाट के जलविद्युत केंद्र से भारत में बिजली का पहला व्यावसायिक उत्पादन शुरू हुआ।

  7. 1901
    ⚗ रसायन विज्ञान

    पी.सी. राय ने भारत की पहली दवा कंपनी स्थापित की

    ‘आधुनिक भारतीय रसायन के जनक’ प्रफुल्ल चंद्र राय ने बंगाल केमिकल्स एंड फ़ार्मास्युटिकल्स की स्थापना की — ब्रिटिश एकाधिकार तोड़ने के स्वदेशी प्रयास का हिस्सा। उन्होंने भारत में रसायन के इतिहास पर भी लिखा।

  8. 27 मई 1909
    📜 भाषा, लेखन और शिक्षा

    भारतीय विज्ञान संस्थान की स्थापना

    📍 बंगलौर

    जमशेदजी टाटा की परिकल्पना और भारत सरकार के आदेश के बाद बंगलौर में भारतीय विज्ञान संस्थान अस्तित्व में आया।

  9. 16 फ़रवरी 1912
    ⚒ धातुएँ और पदार्थ

    जमशेदपुर का इस्पात

    📍 जमशेदपुर, झारखंड

    धमन भट्ठी पहली बार 2 दिसंबर 1911 को चली; कुछ सप्ताह बाद इस्पात का उत्पादन शुरू हुआ।

  10. 1921–1935
    🩺 चिकित्सा और जीव विज्ञान

    आर.एच. दस्तूर का प्रकाश-संश्लेषण अध्ययन

    📍 रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, बंबई

    वनस्पति विभाग के प्रमुख के रूप में रुस्तम होर्मुसजी दस्तूर ने अध्ययन किया कि पानी, तापमान और प्रकाश का रंग प्रकाश-संश्लेषण को कैसे प्रभावित करते हैं।

  11. 16 जुलाई 1929
    🌾 कृषि और वनस्पति

    इंपीरियल काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च की स्थापना

    कृषि पर रॉयल कमीशन की रिपोर्ट के बाद स्थापित; आज यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) है।

  12. 1930
    💻 कंप्यूटिंग और संचार

    रेडियो प्रसारण की शुरुआत

    NCERT की संचार-समयरेखा 1930 को भारत में ऑल इंडिया रेडियो (AIR) प्रसारण की शुरुआत बताती है।

  13. 1930
    ⚛ भौतिकी

    सी.वी. रमन को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार

    “प्रकाश के प्रकीर्णन पर कार्य और उनके नाम पर रखे गए प्रभाव की खोज के लिए” — रमन प्रभाव।

  14. 1931
    ➗ गणित

    भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना

    अंतरराष्ट्रीय ख्याति के वैज्ञानिक और सांख्यिकीविद पी.सी. महालनोबिस द्वारा स्थापित, जिन्होंने बाद में दूसरी पंचवर्षीय योजना बनाने वाले दल का नेतृत्व किया।

अंतरिक्ष, परमाणु और प्रौद्योगिकी

🚀 अंतरिक्ष, परमाणु और प्रौद्योगिकी उपलब्धियाँ → · 🔬 आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियाँ →
  1. 1940 के दशक का अंत
    ☢ परमाणु विज्ञान

    भारत के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत

    होमी जे. भाभा के मार्गदर्शन में, शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा बनाने हेतु शुरू हुआ।

  2. 3 अगस्त 1954
    ☢ परमाणु विज्ञान

    परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना

    राष्ट्रपति के आदेश से, सीधे प्रधानमंत्री के प्रभार में स्थापित।

  3. 4 अगस्त 1956
    ☢ परमाणु विज्ञान

    अप्सरा, एशिया का पहला अनुसंधान रिएक्टर

    📍 ट्रॉम्बे

    अप्सरा क्रांतिकता पर पहुँचा — ऐसा करने वाला एशिया का पहला अनुसंधान रिएक्टर।

  4. 21 मार्च 1956
    🔭 खगोल विज्ञान

    भारतीय राष्ट्रीय पंचांग

    मेघनाद साहा की अध्यक्षता वाली पंचांग सुधार समिति ने एकीकृत राष्ट्रीय पंचांग की सिफ़ारिश की, जो 1 चैत्र 1878 शक से अपनाया गया; यह सूर्य सिद्धांत के सामान्य सिद्धांतों का पालन करता है।

  5. 1957
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    डीज़ल इंजन: WDM-1

    NCERT की भारतीय रेलगाड़ियों की समयरेखा में भाप के बाद WDM-1 डीज़ल इंजन (1957) आता है, और 1970 में WAM-4 विद्युत इंजन।

  6. 1 मार्च 1958
    ☢ परमाणु विज्ञान

    परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना

    परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की योजना और विस्तार के लिए पूर्ण कार्यकारी और वित्तीय अधिकारों वाला परमाणु ऊर्जा आयोग बनाया गया; यह परमाणु ऊर्जा विभाग की नीति बनाता है।

  7. 10 जुलाई 1960
    ☢ परमाणु विज्ञान

    CIRUS अनुसंधान रिएक्टर

    📍 ट्रॉम्बे

    कनाडा के सहयोग से बना 40 मेगावाट-ताप रिएक्टर, जो न्यूट्रॉन अनुसंधान, ईंधन परीक्षण और चिकित्सा, कृषि व उद्योग के लिए रेडियो-आइसोटोप बनाने में काम आया; इसने भारत के भारी-जल रिएक्टर कार्यक्रम के अभियंताओं को प्रशिक्षित किया और 50 वर्ष चला।

  8. 1954–1960
    💻 कंप्यूटिंग और संचार

    टिफ़्रैक: भारत का पहला चालू कंप्यूटर

    📍 टीआईएफ़आर, मुंबई

    टीआईएफ़आर में डिज़ाइन और निर्मित — भारत में चालू होने वाला पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर।

  9. 1962
    🚀 अंतरिक्ष

    INCOSPAR: भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान की शुरुआत

    विक्रम साराभाई की परिकल्पना के अनुसार भारत सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति बनाई।

  10. 1960 और 1970 के दशक
    🌾 कृषि और वनस्पति

    हरित क्रांति

    अधिक उपज वाले बीज, अधिक सिंचाई, उर्वरक और मशीनों से अनाज — विशेषकर गेहूँ और चावल — का उत्पादन बढ़ा और भारत खाद्य में आत्मनिर्भर बना। NCERT मिट्टी और भूजल पर इसकी क़ीमत भी बताता है।

  11. 1968
    🩺 चिकित्सा और जीव विज्ञान

    हरगोबिंद खुराना को नोबेल पुरस्कार

    शरीर-क्रिया विज्ञान या चिकित्सा, रॉबर्ट डब्ल्यू. हॉली और मार्शल डब्ल्यू. निरेनबर्ग के साथ, “आनुवंशिक कूट और प्रोटीन-संश्लेषण में उसके कार्य की व्याख्या के लिए”।

  12. 15 अगस्त 1969
    🚀 अंतरिक्ष

    इसरो का गठन

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग की बड़ी भूमिका के साथ INCOSPAR का स्थान लिया।

  13. 28 अक्टूबर 1969
    ☢ परमाणु विज्ञान

    तारापुर: भारत का पहला परमाणु बिजलीघर

    📍 तारापुर, महाराष्ट्र

    तारापुर परमाणु बिजलीघर की इकाई 1 और 2 — 160-160 मेगावाट के क्वथन-जल रिएक्टर — ने व्यावसायिक संचालन शुरू किया; NPCIL की परमाणु बिजलीघरों की सूची में ये सबसे पहले हैं।

  14. 1960 और 1970 के दशक
    🌾 कृषि और वनस्पति

    श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ़्लड)

    हरित क्रांति के साथ, भारतीय कृषि सुधारने के लिए भारत सरकार की शुरू की गई रणनीतियों में से एक।

  15. 1971
    🩺 चिकित्सा और जीव विज्ञान

    तेल-रिसाव तोड़ने वाला जीवाणु

    आनंद मोहन चक्रवर्ती ने एक ऐसा जीवाणु विकसित किया जो तेल-रिसाव को तोड़ सके; इस खोज को 1980 में पेटेंट मिला।

  16. मई 1974
    ☢ परमाणु विज्ञान

    भारत का पहला परमाणु परीक्षण

    📍 पोखरण

    भारत द्वारा किया गया पहला परमाणु विस्फोट।

  17. 19 अप्रैल 1975
    🚀 अंतरिक्ष

    आर्यभट, भारत का पहला उपग्रह

    📍 सोवियत संघ से प्रक्षेपित

    खगोलविद के नाम पर रखा यह उपग्रह पूरी तरह भारत में डिज़ाइन और निर्मित हुआ और एक सोवियत रॉकेट से प्रक्षेपित हुआ।

  18. 7 जून 1979
    🚀 अंतरिक्ष

    भास्कर-I: पहला भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह

    📍 वोल्गोग्राद प्रक्षेपण केंद्र (अब रूस में)

    भारत में बना पहला प्रायोगिक सुदूर संवेदन उपग्रह; इसके टीवी कैमरे के चित्र जल-विज्ञान और वानिकी में काम आए।

  19. 18 जुलाई 1980
    🚀 अंतरिक्ष

    SLV-3 ने रोहिणी को कक्षा में पहुँचाया

    📍 श्रीहरिकोटा

    भारत के पहले प्रायोगिक उपग्रह प्रक्षेपण यान ने रोहिणी उपग्रह RS-1 को कक्षा में पहुँचाया; भारत अंतरिक्ष-यात्री देशों के विशिष्ट समूह का छठा सदस्य बना।

  20. 19 जून 1981
    🚀 अंतरिक्ष

    APPLE, पहला भारतीय संचार उपग्रह

    📍 कूरू से प्रक्षेपित

    इसरो का पहला स्वदेशी प्रायोगिक संचार उपग्रह, जिसे औद्योगिक शेडों में दो वर्षों में डिज़ाइन और निर्मित किया गया और एरियन रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया।

  21. 1983
    ⚛ भौतिकी

    सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर को नोबेल पुरस्कार

    भौतिकी, विलियम ए. फ़ाउलर के साथ; चंद्रशेखर को “तारों की संरचना और विकास के लिए महत्वपूर्ण भौतिक प्रक्रियाओं के सैद्धांतिक अध्ययन के लिए”।

  22. 30 अगस्त 1983
    🚀 अंतरिक्ष

    इनसैट-1B

    एक संचार उपग्रह जो अक्टूबर 1983 में पूर्ण संचालन क्षमता पर पहुँचा और 1990 तक चला, जिसके सभी 4,375 दो-तरफ़ा वॉयस सर्किट उपयोग में थे; इसने लगभग 36,000 पृथ्वी-चित्र भेजे।

  23. अक्टूबर 1985
    ☢ परमाणु विज्ञान

    फ़ास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर क्रांतिक हुआ

    📍 कलपक्कम

    इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र के 40 मेगावाट-ताप FBTR से भारत फ़ास्ट-ब्रीडर तकनीक वाले देशों के छोटे समूह में शामिल हुआ — यह उसके तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण है। यह स्वदेशी यूरेनियम–प्लूटोनियम कार्बाइड ईंधन पर चलता है।

  24. 1988
    💻 कंप्यूटिंग और संचार

    सी-डैक और PARAM सुपरकंप्यूटर

    अमेरिका द्वारा सुपरकंप्यूटर के आयात से इनकार के बाद उन्हें बनाने के लिए सी-डैक की स्थापना हुई; इसने PARAM से शुरू करके कई पीढ़ियों के सुपरकंप्यूटर बनाए।

  25. मई 1998
    ☢ परमाणु विज्ञान

    पोखरण में परमाणु परीक्षण

    📍 पोखरण

    भारत ने पोखरण में परमाणु विस्फोट किए।

  26. 2002
    🩺 चिकित्सा और जीव विज्ञान

    पोषण विज्ञान पर आधारित मध्याह्न भोजन कार्यक्रम

    कोलुथुर गोपालन ने 500 से अधिक भारतीय खाद्यों का विश्लेषण किया और देश के पोषण का सर्वेक्षण किया; व्यापक कमियों के उनके निष्कर्षों से मध्याह्न भोजन कार्यक्रम बना, जो अब पीएम पोषण है।

  27. 5 मई 2005
    🚀 अंतरिक्ष

    कार्टोसैट-1: त्रिविम मानचित्र

    📍 श्रीहरिकोटा

    कक्षा में त्रिविम (स्टीरियो) चित्र लेने वाला पहला भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह, 2.5 मीटर विभेदन के साथ — ऊँचाई-मॉडलों और मानचित्रों के लिए। NCERT के अनुसार कार्टोसैट के चित्र भुवन मानचित्र-मंच में काम आते हैं।

  28. 22 अक्टूबर 2008
    🚀 अंतरिक्ष

    चंद्रयान-1

    📍 श्रीहरिकोटा

    चंद्रमा पर भारत का पहला मिशन, श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित।

  29. 1 जुलाई 2013
    🚀 अंतरिक्ष

    IRNSS-1A: भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली की शुरुआत

    📍 श्रीहरिकोटा

    भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली के सात उपग्रहों में पहला, जिसके नेविगेशन पेलोड में रूबिडियम परमाणु घड़ी है।

  30. 5 नवंबर 2013
    🚀 अंतरिक्ष

    मंगल कक्षित्र मिशन

    📍 श्रीहरिकोटा

    भारत का पहला अंतरग्रहीय मिशन; इसरो मंगल की कक्षा तक पहुँचने वाली चौथी अंतरिक्ष एजेंसी बना।

  31. 28 सितंबर 2015
    🚀 अंतरिक्ष

    एस्ट्रोसैट, भारत की अंतरिक्ष वेधशाला

    📍 श्रीहरिकोटा

    भारत की पहली समर्पित अंतरिक्ष खगोल वेधशाला, जिसके पाँच पेलोड एक ही स्रोत को एक साथ सुदूर पराबैंगनी से गामा किरणों तक देखते हैं।

  32. 25 अगस्त 2016
    💻 कंप्यूटिंग और संचार

    यूपीआई: तुरंत डिजिटल भुगतान

    📍 भारत

    एनपीसीआई द्वारा शुरू; आज विश्व की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली।

  33. 22 जुलाई 2019
    🚀 अंतरिक्ष

    चंद्रयान-2

    चंद्रमा के अनदेखे दक्षिणी ध्रुव की खोज के लिए ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर — इसरो के लिए एक बड़ी तकनीकी छलाँग। यह 20 अगस्त 2019 को चंद्र-कक्षा में पहुँचा।

  34. 2019
    🏗 अभियांत्रिकी, जल और नगर

    वंदे भारत ट्रेनें

    विद्युत वंदे भारत ट्रेन — भाप, डीज़ल और विद्युत इंजनों के बाद NCERT की भारतीय रेलगाड़ियों की समयरेखा का नवीनतम चरण।

  35. दिसंबर 2022
    🔭 खगोल विज्ञान

    हानले डार्क स्काई रिज़र्व

    📍 हानले, लद्दाख

    हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप के आसपास का क्षेत्र — जिसका नाम सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर पर है और जो विश्व की सबसे ऊँची वेधशालाओं में से एक है — डार्क स्काई रिज़र्व घोषित हुआ।

  36. 2 सितंबर 2023
    🚀 अंतरिक्ष

    आदित्य-L1 सूर्य का अध्ययन

    सूर्य के व्यापक अध्ययन के लिए समर्पित उपग्रह, सात स्वदेशी पेलोड के साथ, पृथ्वी और सूर्य के बीच L1 बिंदु के पास स्थापित।

  37. 23 अगस्त 2023
    🚀 अंतरिक्ष

    चंद्रयान-3 चंद्रमा पर उतरा

    📍 चंद्रमा

    सफल सॉफ़्ट लैंडिंग, जिसके बाद रोवर चंद्रमा की सतह पर उतरा।

वैज्ञानिक और विद्वान

पाणिनिचरकआर्यभट 476–550वराहमिहिर 505–587ब्रह्मगुप्त 598–668अल-बिरूनी 973–1050भास्कराचार्य (भास्कर द्वितीय) 1114–1185जगदीशचंद्र बसु 1858–1937प्रफुल्लचंद्र राय 1861–1944एम. विश्वेश्वरैया 1861–1962श्रीनिवास रामानुजन 1887–1920सी. वी. रमन 1888–1970मेघनाद साहा 1893–1956सत्येंद्रनाथ बोस 1894–1974होमी जहाँगीर भाभा 1909–1966विक्रम साराभाई 1919–1971वर्गीज़ कुरियन 1921–2012एम. एस. स्वामीनाथन 1925–2023ए. पी. जे. अब्दुल कलाम 1931–2015राकेश शर्मा 1949–कल्पना चावला 1962–2003
🎓 पाठ्यक्रम में

Mains · General Studies Paper III: “Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.” UPSC ↗

✍ विज्ञान और प्रौद्योगिकी का अभ्यास करें ऊपर की उपलब्धियों से बने परीक्षा-शैली के प्रश्न और फ़्लैशकार्ड। ✍ क्विज़ दीजिए 🃏 फ़्लैशकार्ड

हम कैसे जाँचते हैं: विज्ञान की उपलब्धियाँ NCERT पाठ्यपुस्तकों और आधिकारिक पृष्ठों (NobelPrize.org, इसरो, परमाणु ऊर्जा विभाग, BARC, IISc) से लिखी गई हैं, और हमारा बिल्ड तभी पूरा होता है जब उनके मुख्य वाक्यांश स्वयं स्रोत में मिलें। औज़ार और प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों के अपने स्रोत हैं। तिथियाँ वैसी ही हैं जैसी स्रोत देता है; जहाँ वह केवल काल बताता है, वहाँ हम भी वही बताते हैं। जो दावे ऐसे स्रोतों में नहीं मिलते, उन्हें छोड़ दिया गया है — चाहे वे कहीं और कितनी भी बार दोहराए जाते हों।