📄 पुनरावृत्ति पत्रक · YugMap
दिल्ली सल्तनत, विजयनगर और बहमनी
1206 – 1525
प्रमुख घटनाएँ
| 1206 | दिल्ली सल्तनत की स्थापना |
| 1211 | इल्तुतमिश सुल्तान बना |
| 1221 | चंगेज़ ख़ान ने जलालुद्दीन का सिंधु तक पीछा किया |
| 1228 | सुकाफ़ा ने अहोम राज्य की स्थापना की |
| 1229 | इल्तुतमिश को ख़लीफ़ा से मान्यता-पत्र मिला |
| 1236 | रज़िया सुल्तान सिंहासन पर बैठी |
| 1240 | रज़िया सुल्तान पदच्युत और मारी गई |
| लगभग 1250 | कोणार्क सूर्य मंदिर का निर्माण |
| 1266 | बलबन सुल्तान बना |
| 1279 | चोल वंश का अंत |
| 1290 | ख़िलजी क्रांति |
| 1292 | मार्को पोलो की पांड्य तट यात्रा |
| 1296 | अलाउद्दीन ख़िलजी का देवगिरि पर आक्रमण |
| 1296 | अलाउद्दीन ख़िलजी सुल्तान बना |
| 1299 | कीली में मंगोल पराजित |
| 1301 | अलाउद्दीन ख़िलजी ने रणथंभौर जीता |
| 1303 | चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी |
| 1310 | मलिक काफ़ूर ने वारंगल जीता |
| 1311 | मलिक काफ़ूर का दक्षिणी अभियान मदुरै पहुँचा |
| 1316 | अलाउद्दीन ख़िलजी की मृत्यु |
| 1320 | ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने तुग़लक़ वंश की स्थापना की |
| 1323 | काकतीयों का पतन |
| 1327 | राजधानी दौलताबाद स्थानांतरित |
| लगभग 1329 | मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने सांकेतिक मुद्रा चलाई |
| 1334 | इब्न बतूता दिल्ली पहुँचा |
| 1336 | विजयनगर की स्थापना |
| 1347 | बहमनी सल्तनत की स्थापना |
| 1351 | फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ सुल्तान बना |
| 1352 | इलियास शाह ने बंगाल को एकीकृत किया |
| 1378 | विजयनगर ने मदुरै सल्तनत को मिलाया |
| 1398 | तैमूर ने दिल्ली लूटी |
| 1407 | गुजरात सल्तनत स्वतंत्र हुई |
| 1411 | अहमदाबाद की स्थापना |
| 1414 | ख़िज़्र ख़ान ने सैयद वंश की स्थापना की |
| 1420 | निकोलो दे कोंटी की विजयनगर यात्रा |
| 1443 | अब्दुर रज़्ज़ाक़ का विजयनगर दूतावास |
| लगभग 1450 | वाराणसी में कबीर की कविता |
| लगभग 1450 | बागेरहाट की साठ गुंबद मस्जिद |
| 1469 | गुरु नानक का जन्म |
| 1498 | वास्को द गामा कालीकट पहुँचा |
मुख्य शब्द
- अमर-नायक
- विजयनगर के सैन्य सेनापति जो क्षेत्रों पर शासन करते और कर वसूलते थे; यह व्यवस्था संभवतः दिल्ली सल्तनत की इक्ता व्यवस्था से ली गई। (NCERT Class 12, An Imperial Capital: Vijayanagara)
- दरगाह
- किसी सूफ़ी शेख़ का मक़बरा-तीर्थ (फ़ारसी शब्द, अर्थ ‘दरबार’), जो भक्ति और तीर्थयात्रा का केंद्र बना। (NCERT Class 12, Bhakti-Sufi Traditions)
- ख़ानक़ाह
- सूफ़ी आश्रय-स्थल, जिसका संचालन एक शिक्षक-गुरु (शेख़, पीर या मुर्शिद) करता था और जिसके इर्द-गिर्द सूफ़ी समुदाय संगठित होते थे। (NCERT Class 12, Bhakti-Sufi Traditions)
- रिहला
- इब्न बतूता का अरबी में लिखा यात्रा-वृत्तांत, जिसमें चौदहवीं सदी के उपमहाद्वीप के जीवन का विस्तृत वर्णन है। (NCERT Class 12, Through the Eyes of Travellers)
आगे क्या
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