A History of South India
प्रागैतिहास से विजयनगर के पतन तक दक्षिण भारत का क्लासिक सर्वेक्षण।
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मानचित्र उनके जीवनकाल के आसपास होयसल साम्राज्य को और उनके जीवनकाल की घटनाओं के स्थान दिखाता है।
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| 1017 | चोलों की श्रीलंका विजय पूर्ण उत्तरी श्रीलंका चोलों का 'मुम्मुडि-चोल-मंडलम' प्रांत बन गया। |
| 1018 | महमूद ने मथुरा और कन्नौज लूटे प्रतिहार राजधानी लूटी गई। |
| लगभग 1023 | राजेंद्र का गंगा अभियान; गंगैकोंड चोलपुरम की स्थापना चोल सेनाएँ गंगा तक पहुँचीं और विजय की स्मृति में नई राजधानी बसाई गई। |
| 1025 | श्रीविजय पर चोल नौसैनिक अभियान श्रीविजय के बंदरगाहों पर हमले से चीन तक चोल व्यापार मार्ग सुरक्षित हुए। |
| 1026 | महमूद ग़ज़नवी का सोमनाथ पर आक्रमण सोमनाथ मंदिर लूटा गया और महमूद भारी ख़ज़ाना ग़ज़नी ले गया। |
| 1030 | अल-बिरूनी ने किताब-उल-हिंद लिखी |
| लगभग 1055 | राजा भोज की मृत्यु चौलुक्यों और कलचुरियों के हमलों से परमार शक्ति घटी। |
| 1070 | विजयबाहु प्रथम ने चोलों को श्रीलंका से निकाला पोलोन्नरुवा को राजधानी बनाकर सिंहली शासन बहाल हुआ। |
| 1076 | विक्रमादित्य षष्ठ का चालुक्य-विक्रम संवत |
| लगभग 1135 | पुरी के जगन्नाथ मंदिर का निर्माण आरंभ |
जीवनकाल के साझा वर्षों के अनुसार क्रमबद्ध। पट्टी दिखाती है कि रामानुजाचार्य के जीवन में कब।
प्रागैतिहास से विजयनगर के पतन तक दक्षिण भारत का क्लासिक सर्वेक्षण।
शुरुआत का सबसे आसान रास्ता: छोटी, सचित्र और अनगिनत परीक्षा प्रश्नों का आधार।
हड़प्पा, विजयनगर, मुग़ल दरबार और 1857 पर स्रोत-आधारित अध्याय — UPSC के लिए अनिवार्य।
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