लोकप्रिय इतिहास
Ranjit Singh: Maharaja of the Punjab
सिख साम्राज्य के संस्थापक की पठनीय जीवनी।
पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह का साम्राज्य, जिसे 1849 में अंग्रेज़ों ने मिला लिया।
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| नाम | प्रकार | अवधि | क्षेत्र | राजधानी |
|---|---|---|---|---|
| सिख साम्राज्य ★ | साम्राज्य | 1799 – 1849 | उत्तर | लाहौर |
| सिख मिसलें | संघ | 1748 – 1799 | उत्तर | अमृतसर |
| वर्ष | घटना | राज्य |
|---|---|---|
| 1799 | श्रीरंगपट्टनम का पतन टीपू सुल्तान मारा गया और वोडेयारों को कंपनी के सहयोगी के रूप में बहाल किया गया। |
मैसूर राज्य |
| 1799 | रणजीत सिंह ने लाहौर जीता | सिख साम्राज्य |
| 1802 | बसई की संधि पेशवा बाजीराव द्वितीय ने सहायक संधि स्वीकार की। |
मराठा साम्राज्य |
| 1803 | असाये का युद्ध आर्थर वेलेज़ली ने सिंधिया और भोंसले की संयुक्त सेनाओं को हराया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1803 | अंग्रेज़ों ने दिल्ली जीती मुग़ल बादशाह ब्रिटिश संरक्षण में आ गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1806 | वेल्लोर विद्रोह | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1809 | अमृतसर की संधि से सतलुज सीमा तय रणजीत सिंह ने सतलुज के दक्षिण में विस्तार न करने की सहमति दी। |
सिख साम्राज्य |
| 1814 | आंग्ल-नेपाल युद्ध: नालापानी की घेराबंदी बलभद्र कुँवर के नेतृत्व में गोरखा दुर्ग-सेना पीछे हटने से पहले डटी रही। |
नेपाल राज्य — विस्तार काल |
| 1815 | कैंडी समझौता कैंडी राज्य समाप्त हुआ और पूरा श्रीलंका ब्रिटिश शासन में आ गया। |
कैंडी राज्य |
| 1816 | सुगौली की संधि नेपाल ने कुमाऊँ, गढ़वाल और तराई सौंपी और ब्रिटिश रेज़िडेंट स्वीकार किया। |
नेपाल राज्य |
| 1817 | खड़की का युद्ध पुणे के पास पेशवा की सेना हारी। |
मराठा साम्राज्य |
| 1818 | तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त पेशवा के प्रदेश मिला लिए गए और कंपनी सर्वोच्च शक्ति बन गई। |
मराठा साम्राज्य |
| 1824 | कंपनी के विरुद्ध कित्तूर विद्रोह रानी चेन्नम्मा ने आरंभिक जीत पाई, पर दूसरे हमले में बंदी बना ली गईं। |
|
| 1826 | यांडाबो की संधि बर्मा ने असम, मणिपुर, अराकान और तेनासरिम कंपनी को सौंप दिए। |
अहोम राज्य |
| 1828 | ब्रह्म समाज की स्थापना | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1829 | सती प्रथा का उन्मूलन | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1835 | अंग्रेज़ी शिक्षा अधिनियम | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1839 | महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु | सिख साम्राज्य |
| 1839 | प्रथम आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध का आरंभ शाह शुजा को काबुल की गद्दी पर बैठाया गया, पर 1842 में ब्रिटिश सेना नष्ट हो गई। |
अफ़ग़ानिस्तान अमीरात |
| 1842 | काबुल से ब्रिटिश वापसी पीछे हटती लगभग पूरी ब्रिटिश टुकड़ी का सफ़ाया हो गया। |
अफ़ग़ानिस्तान अमीरात |
| 1843 | सिंध का विलय मियानी के युद्ध के बाद सिंध मिला लिया गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1845 | प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध सिखों ने जालंधर दोआब सौंपा और हर्जाना दिया। |
सिख साम्राज्य |
| 1846 | गुलाब सिंह को जम्मू-कश्मीर सौंपा गया डोगरा शासित जम्मू-कश्मीर रियासत बनी। |
|
| 1846 | कोत पर्व; नेपाल में राणा शासन का आरंभ जंग बहादुर राणा ने सत्ता हथियाई और राणा प्रधानमंत्रियों ने 104 वर्ष शासन किया। |
नेपाल राज्य |
| 1848 | सतारा पर व्यपगत का सिद्धांत लागू शासक की बिना प्राकृतिक उत्तराधिकारी के मृत्यु होने पर सतारा मिला लिया गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1849 | पंजाब का विलय सिख साम्राज्य समाप्त हुआ और महाराजा दलीप सिंह को पेंशन देकर हटा दिया गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
सिख साम्राज्य के संस्थापक की पठनीय जीवनी।
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