संदर्भ ग्रंथ
The Marathas 1600–1818
शिवाजी के स्वराज्य से उपमहाद्वीपीय शक्ति तक मराठा राज्य का उदय।
शिवाजी का स्वराज्य 18वीं शताब्दी में भारत के बड़े भाग पर छाए एक संघ में बदल जाता है।
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| नाम | प्रकार | अवधि | क्षेत्र | राजधानी |
|---|---|---|---|---|
| मैसूर राज्य ★ | राज्य | 1399 – 1950 | दक्षिण | मैसूर / श्रीरंगपट्टनम |
| मराठा साम्राज्य ★ | साम्राज्य | 1674 – 1818 | दक्कन | रायगढ़, बाद में सतारा / पुणे |
| बंगाल के नवाब ★ | राज्य | 1717 – 1765 | पूर्व | मुर्शिदाबाद |
| हैदराबाद राज्य (निज़ाम) ★ | राज्य | 1724 – 1948 | दक्कन | औरंगाबाद, बाद में हैदराबाद |
| कर्नाटक (आरकाट के नवाब) | राज्य | 1692 – 1855 | दक्षिण | अर्काट |
| होतक वंश | राजवंश | 1709 – 1738 | उत्तर-पश्चिम | कंधार |
| गायकवाड़ राज्य (बड़ौदा) | राज्य | 1721 – 1949 | पश्चिम | बड़ौदा |
| रुहेलखंड | राज्य | 1721 – 1774 | गंगा का मैदान | आँवला / बरेली |
| भरतपुर का जाट राज्य | राज्य | 1722 – 1947 | उत्तर | डीग / भरतपुर |
| अवध (अवध के नवाब) | राज्य | 1722 – 1856 | गंगा का मैदान | फ़ैज़ाबाद, बाद में लखनऊ |
| त्रावणकोर | राज्य | 1729 – 1949 | दक्षिण | पद्मनाभपुरम, बाद में तिरुवनंतपुरम |
| होलकर राज्य (इंदौर) | राज्य | 1731 – 1948 | मध्य भारत | महेश्वर, बाद में इंदौर |
| सिंधिया राज्य (ग्वालियर) | राज्य | 1731 – 1948 | मध्य भारत | उज्जैन, बाद में ग्वालियर |
| नागपुर के भोंसले | राज्य | 1739 – 1853 | मध्य भारत | नागपुर |
| दुर्रानी साम्राज्य | साम्राज्य | 1747 – 1823 | उत्तर-पश्चिम | कंधार, बाद में काबुल |
| नेपाल राज्य — विस्तार काल | राज्य | 1768 – 1816 | हिमालय | काठमांडू |
| तंजावुर मराठा राज्य | राज्य | 1674 – 1855 | दक्षिण | तंजावुर |
| वर्ष | घटना | राज्य |
|---|---|---|
| 1674 | शिवाजी का छत्रपति के रूप में राज्याभिषेक | मराठा साम्राज्य |
| 1675 | गुरु तेग़ बहादुर की शहादत | मुग़ल साम्राज्य |
| 1679 | औरंगज़ेब ने फिर से जज़िया लगाया इससे अनेक राजपूत और अन्य प्रजाजन विमुख हुए। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1680 | शिवाजी की मृत्यु उनके पुत्र संभाजी उत्तराधिकारी बने। |
मराठा साम्राज्य |
| 1681 | औरंगज़ेब दक्कन गया | मुग़ल साम्राज्य |
| 1686 | मुग़लों ने बीजापुर मिलाया बीजापुर का आदिलशाही वंश समाप्त हुआ। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1687 | मुग़लों ने गोलकुंडा मिलाया गोलकुंडा का क़ुतुबशाही वंश समाप्त हुआ। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1689 | संभाजी का वध | मराठा साम्राज्य |
| 1690 | जॉब चार्नॉक ने कलकत्ता बसाया कलकत्ता आगे चलकर ब्रिटिश भारत की राजधानी बना। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1699 | गुरु गोबिंद सिंह ने ख़ालसा की स्थापना की | |
| 1707 | औरंगज़ेब की मृत्यु | मुग़ल साम्राज्य |
| 1708 | गुरु गोबिंद सिंह का निधन उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत गुरु घोषित किया। |
|
| 1709 | कंधार में मीरवाइस होतक का विद्रोह | होतक वंश |
| 1713 | बालाजी विश्वनाथ पेशवा बने | मराठा साम्राज्य |
| 1716 | बंदा सिंह बहादुर की शहादत | मुग़ल साम्राज्य |
| 1717 | फ़र्रुख़सियर का ईस्ट इंडिया कंपनी को फ़रमान | मुग़ल साम्राज्य |
| 1720 | बाजीराव प्रथम पेशवा बने | मराठा साम्राज्य |
| 1724 | शकर खेड़ा का युद्ध: हैदराबाद राज्य की स्थापना निज़ाम-उल-मुल्क ने मुग़ल सूबेदार को हराकर हैदराबाद राज्य की स्थापना की। |
हैदराबाद राज्य (निज़ाम) |
| 1737 | बाजीराव का दिल्ली पर धावा | मराठा साम्राज्य |
| 1739 | नादिर शाह ने दिल्ली लूटी दिल्ली लूटी गई और मयूर सिंहासन व कोहिनूर फ़ारस ले जाए गए। |
मुग़ल साम्राज्य |
| 1741 | कोलाचेल का युद्ध त्रावणकोर ने डचों को हराया, जिससे केरल में डच महत्वाकांक्षाएँ समाप्त हुईं। |
त्रावणकोर |
| 1742 | बंगाल पर मराठा (बरगी) हमले | बंगाल के नवाब |
| 1746 | फ़्रांसीसियों ने मद्रास जीता (प्रथम कर्नाटक युद्ध) | फ्रांसीसी भारत |
| 1747 | अहमद शाह दुर्रानी ने दुर्रानी साम्राज्य की स्थापना की | दुर्रानी साम्राज्य |
| 1749 | अंबूर का युद्ध अनवरुद्दीन ख़ान मारा गया; फ़्रांसीसी समर्थित चंदा साहिब ने अर्काट लिया। |
कर्नाटक (आरकाट के नवाब) |
| 1751 | अर्काट की घेराबंदी क्लाइव की अर्काट रक्षा ने दूसरे कर्नाटक युद्ध को ब्रिटेन के पक्ष में मोड़ दिया। |
कर्नाटक (आरकाट के नवाब) |
| 1757 | प्लासी का युद्ध सिराजुद्दौला हारा और मीर जाफ़र कंपनी-समर्थित नवाब बना। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1760 | वांडीवाश का युद्ध भारत में फ़्रांसीसी शक्ति टूट गई। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1761 | पानीपत का तीसरा युद्ध अहमद शाह दुर्रानी ने मराठों को कुचल दिया और उनका उत्तर की ओर विस्तार रुक गया। |
मराठा साम्राज्य |
| 1764 | बक्सर का युद्ध कंपनी ने मीर क़ासिम, शुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय को एक साथ हराया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1765 | बंगाल की दीवानी प्रदान कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा में राजस्व वसूलने का अधिकार मिला। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1767 | प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध | मैसूर राज्य |
| 1768 | पृथ्वी नारायण शाह ने काठमांडू जीता काठमांडू एकीकृत नेपाल की राजधानी बना। |
नेपाल राज्य — विस्तार काल |
| 1769 | मद्रास की संधि जीते हुए प्रदेश परस्पर लौटाकर प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध समाप्त हुआ। |
मैसूर राज्य |
| 1770 | बंगाल का महान अकाल | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1773 | रेग्युलेटिंग एक्ट; वॉरेन हेस्टिंग्स गवर्नर-जनरल | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1775 | प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का आरंभ | मराठा साम्राज्य |
| 1780 | पोल्लिलूर का युद्ध हैदर अली और टीपू सुल्तान ने कर्नल बेली की कंपनी सेना नष्ट कर दी। |
मैसूर राज्य |
| 1782 | सालबाई की संधि प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध पूर्व स्थिति की बहाली के साथ समाप्त हुआ। |
सिंधिया राज्य (ग्वालियर) |
| 1784 | एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1784 | मंगलौर की संधि परस्पर वापसी के आधार पर द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध समाप्त हुआ। |
मैसूर राज्य |
| 1792 | श्रीरंगपट्टनम की संधि टीपू सुल्तान ने आधा राज्य सौंपा और दो पुत्र बंधक के रूप में दिए। |
मैसूर राज्य |
| 1793 | बंगाल का स्थायी बंदोबस्त | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1795 | खरदा का युद्ध मराठों ने हैदराबाद के निज़ाम को हराया। |
मराठा साम्राज्य |
| 1796 | अंग्रेज़ों ने डचों से तटीय सीलोन लिया तटीय श्रीलंका ब्रिटेन को मिला, जिसकी पुष्टि अमीएँ की संधि से हुई। |
ब्रिटिश सीलोन |
| 1798 | हैदराबाद ने सहायक संधि स्वीकार की निज़ाम वेलेज़ली की व्यवस्था स्वीकार करने वाला पहला शासक बना। |
हैदराबाद राज्य (निज़ाम) |
| 1799 | श्रीरंगपट्टनम का पतन टीपू सुल्तान मारा गया और वोडेयारों को कंपनी के सहयोगी के रूप में बहाल किया गया। |
मैसूर राज्य |
| 1799 | रणजीत सिंह ने लाहौर जीता | सिख साम्राज्य |
| 1802 | बसई की संधि पेशवा बाजीराव द्वितीय ने सहायक संधि स्वीकार की। |
मराठा साम्राज्य |
| 1803 | असाये का युद्ध आर्थर वेलेज़ली ने सिंधिया और भोंसले की संयुक्त सेनाओं को हराया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1803 | अंग्रेज़ों ने दिल्ली जीती मुग़ल बादशाह ब्रिटिश संरक्षण में आ गया। |
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1806 | वेल्लोर विद्रोह | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी |
| 1809 | अमृतसर की संधि से सतलुज सीमा तय रणजीत सिंह ने सतलुज के दक्षिण में विस्तार न करने की सहमति दी। |
सिख साम्राज्य |
| 1814 | आंग्ल-नेपाल युद्ध: नालापानी की घेराबंदी बलभद्र कुँवर के नेतृत्व में गोरखा दुर्ग-सेना पीछे हटने से पहले डटी रही। |
नेपाल राज्य — विस्तार काल |
| 1815 | कैंडी समझौता कैंडी राज्य समाप्त हुआ और पूरा श्रीलंका ब्रिटिश शासन में आ गया। |
कैंडी राज्य |
| 1816 | सुगौली की संधि नेपाल ने कुमाऊँ, गढ़वाल और तराई सौंपी और ब्रिटिश रेज़िडेंट स्वीकार किया। |
नेपाल राज्य |
| 1817 | खड़की का युद्ध पुणे के पास पेशवा की सेना हारी। |
मराठा साम्राज्य |
| 1818 | तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त पेशवा के प्रदेश मिला लिए गए और कंपनी सर्वोच्च शक्ति बन गई। |
मराठा साम्राज्य |
शिवाजी के स्वराज्य से उपमहाद्वीपीय शक्ति तक मराठा राज्य का उदय।
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