🌏 भारत और विश्व

⛵ खोजी और समुद्री यात्राएँ

भारत के अपने नाविक — लोथल के गोदीबाड़े से राजेंद्र चोल की नौसेना और ओडिशा के साधबों तक — एशिया पार करने वाले तीर्थयात्री, दुनिया को जोड़ने वाली समुद्री यात्राएँ, और एवरेस्ट, अंटार्कटिका और अंतरिक्ष में भारत के आधुनिक खोजी।

मानचित्र भारत की सीमाएँ वैसी ही दिखाते हैं जैसी भारत सरकार आधिकारिक रूप से दर्शाती है। पिन अनुमानित स्थान दिखाते हैं।

⛵ भारत समुद्र की ओर

भारतीय जहाज़ों के पाँच हज़ार वर्ष — लोथल का गोदीबाड़ा, वे बंदरगाह जहाँ से समुद्री मार्ग शुरू होते थे, जहाज़ों वाले सातवाहन सिक्के, चोल नौसेना और ओडिशा के साधब।

  1. हड़प्पा सभ्यता

    लोथल का गोदीबाड़ा

    गुजरात के लोथल में एक विशाल गोदीबाड़ा था, और हड़प्पाई मुहरों पर जहाज़ और नावें बनी हैं — भारतीय समुद्री यात्रा के सबसे पुराने प्रमाणों में से।

  2. जहाँ से समुद्री मार्ग शुरू होते थे

    कुछ प्रारंभिक नगर, जैसे कावेरी डेल्टा का पुहार, तट के पास थे, और वहीं से समुद्री मार्ग शुरू होते थे।

  3. सातवाहन सिक्कों पर जहाज़

    कई सातवाहन सिक्कों पर जहाज़ बने हैं, जिससे पता चलता है कि समुद्री व्यापार आर्थिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा था; उनके व्यापारिक तंत्र रोमन साम्राज्य तक पहुँचते थे।

  4. गुप्त युग

    सोकोत्रा पर भारतीय व्यापारी

    गुप्त युग में भारत भूमध्यसागरीय दुनिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन से व्यापार करता था। अरब सागर का सोकोत्रा द्वीप भूमध्यसागरीय बाज़ारों के रास्ते का एक पड़ाव था, और वहाँ की खोजें कई शताब्दियों तक भारतीय व्यापारियों की उपस्थिति दिखाती हैं।

  5. लगभग चौथी शताब्दी ई.

    समुद्र पार गई एक लिपि

    भारत ने व्यापार, तीर्थयात्रा और संस्कृति के माध्यम से अपनी परंपराएँ शांतिपूर्वक फैलाईं। लगभग चौथी शताब्दी ई. में आज के मलेशिया के क्षेत्र ने भारत की ब्राह्मी पर आधारित लिपि अपनाई।

  6. 1025

    राजेंद्र चोल का नौसैनिक अभियान

    चोलों के समय चीन से व्यापार फला-फूला। एक समुद्री मार्ग मलक्का जलडमरूमध्य से होकर जाता था, जिस पर श्रीविजय का नियंत्रण था; राजेंद्र चोल ने दक्षिण-पूर्व एशिया में नौसैनिक अभियान भेजा — कई भारतीय व्यापारी श्रेणियों के समर्थन से एक दंडात्मक अभियान।

  7. हर कार्तिक पूर्णिमा

    बाली जात्रा: साधबों की यात्राएँ

    कटक में महानदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा से होने वाला ओडिशा का सबसे बड़ा खुला सांस्कृतिक उत्सव ओडिया व्यापारियों — साधबों — की बाली, जावा, सुमात्रा और बोर्नियो की यात्राओं की याद दिलाता है।

  8. 18वीं सदी का आरंभ

    कान्होजी आंग्रे और मराठा नौसेना

    यूरोपीय भारतीय जहाज़ों को समुद्री परमिट ख़रीदने पर मजबूर करते थे। कान्होजी आंग्रे के नेतृत्व में मराठों ने कई नौसैनिक युद्ध जीते और स्वयं यूरोपीयों से परमिट माँगने लगे।

☸ भिक्षु, तीर्थयात्री और यात्री

वे मार्ग और समुद्री रास्ते जो बुद्ध का संदेश भारत से बाहर ले गए — और वे यात्री जो दूसरी दिशा से आए और जो देखा उसके बारे में लिखा।

  1. बुद्ध का संदेश समुद्र पार

    बुद्ध का संदेश मध्य एशिया होते हुए चीन, कोरिया और जापान तक, और श्रीलंका होते हुए समुद्र पार म्यांमार, थाईलैंड और इंडोनेशिया तक फैला।

  2. 399

    चीन से फ़ाहियान आते हैं

    चीनी बौद्ध भिक्षु फ़ाहियान (फ़ा श्यान) लगभग पाँचवीं सदी ई. में बौद्ध ग्रंथों की खोज में चीन से भारत आए।

  3. सातवीं सदी ई.

    ह्वेनसांग और नालंदा

    चीनी तीर्थयात्री ह्वेनसांग (श्वेन त्सांग) बौद्ध ग्रंथों की खोज में आए। नालंदा के बारे में हमारी अधिकांश जानकारी उनके विवरणों से आती है।

  4. 13वीं सदी का अंत

    मार्को पोलो

    इटली के मार्को पोलो (1254–1323) तेरहवीं सदी के अंत में वेनिस के अपने घर से चीन — और भारत भी — गए।

  5. 1333–1354

    इब्न बतूता: तंजियर से दिल्ली और चीन

    तंजियर में जन्मे मोरक्को के यात्री इब्न बतूता 1333 में सिंध पहुँचे। 1342 में दिल्ली के सुल्तान ने उन्हें अपना दूत बनाकर चीन भेजा; वे 1354 में घर लौटे।

🧭 दुनिया को जोड़ने वाली यात्राएँ

यूरोप के नाविक अमेरिका और भारत पहुँचते हैं, कुक अंटार्कटिका की परिक्रमा करते हैं, डार्विन गालापागोस की ओर निकलते हैं, और अमुंडसेन दक्षिणी ध्रुव पहुँचते हैं।

  1. 1492

    कोलंबस वेस्ट इंडीज़ पहुँचता है

    स्पेन से पश्चिम की ओर चलकर कोलंबस 1492 में वेस्ट इंडीज़ पहुँचा।

  2. मई 1498

    वास्को द गामा भारत पहुँचता है

    वास्को द गामा 1498 में भारत पहुँचा और कोझिकोड (कालीकट) के पास कप्पड़ में उतरा — अफ़्रीका का चक्कर लगाकर यूरोप से भारत की पहली समुद्री यात्रा।

  3. 1510

    पुर्तगाली गोवा लेते हैं

    पुर्तगालियों ने 1510 में गोवा सहित कई सामरिक बंदरगाह छीने, और जहाज़ों के परमिट के सहारे लगभग एक शताब्दी तक भारत और यूरोप के बीच मसाला व्यापार पर नियंत्रण रखा।

  4. 1772–75

    कैप्टन कुक अंटार्कटिका की परिक्रमा करते हैं

    17वीं सदी तक अधिकांश खोजी अंटार्कटिका की यात्रा को लगभग असंभव मानते थे। कैप्टन जेम्स कुक ने 1772–75 में इस महाद्वीप की परिक्रमा की।

  5. 1831

    डार्विन गालापागोस की ओर

    चार्ल्स डार्विन 1831 में प्रशांत महासागर और गालापागोस द्वीपों की यात्रा पर निकले — वह यात्रा जिससे उनका विकासवाद का सिद्धांत बना।

  6. 1911

    अमुंडसेन दक्षिणी ध्रुव पहुँचते हैं

    1911 में नॉर्वे के खोजी रोआल्ड अमुंडसेन दक्षिणी ध्रुव पहुँचे। केवल तीन सप्ताह बाद ब्रिटिश खोजी रॉबर्ट एफ़. स्कॉट भी वहाँ पहुँचे, पर अपने प्राण गँवाकर।

🏔 दुनिया की छत तक

1953 में एवरेस्ट, 1965 में शिखर पर पहला भारतीय दल, और वे भारतीय महिलाएँ जो पहले पहुँचीं — पर्वत के ऊपर भी और समुद्र के पार भी।

  1. 29 मई 1953

    एवरेस्ट पर तेनज़िंग नोर्गे और एडमंड हिलेरी

    तेनज़िंग नोर्गे छह बार एवरेस्ट जा चुके थे और सातवें प्रयास में सफल हुए: 1953 के ब्रिटिश अभियान के सदस्य के रूप में उन्होंने 29 मई 1953 को एडमंड हिलेरी के साथ दुनिया के सबसे ऊँचे पर्वत पर पहली चढ़ाई की।

  2. 4 नवंबर 1954

    हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान

    एवरेस्ट की चढ़ाई से भारत में पर्वतारोहण को एक संगठित खेल के रूप में बढ़ने की प्रेरणा मिली। हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान 4 नवंबर 1954 को तेनज़िंग के गृहनगर दार्जिलिंग में स्थापित हुआ, और तेनज़िंग उसके फ़ील्ड प्रशिक्षण निदेशक थे।

  3. 1965

    नवांग गोम्बू: दो बार एवरेस्ट

    नवांग गोम्बू एवरेस्ट के शिखर पर दो बार पहुँचने वाले पहले व्यक्ति थे — 1963 में एक अमेरिकी दल के साथ और फिर 1965 के भारतीय एवरेस्ट अभियान के साथ।

  4. 23 मई 1984

    बछेंद्री पाल: एवरेस्ट पर पहली भारतीय महिला

    अभियान में 6 महिलाएँ और 11 पुरुष थे; बछेंद्री पाल अपने दल में आगे बढ़ने वाली अकेली महिला थीं, और वे 23 मई 1984 को दोपहर 1:07 बजे शिखर पर पहुँचीं।

  5. अरुणिमा सिन्हा

    2011 में अपना बायाँ पैर खो देने वाली अरुणिमा सिन्हा एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली दिव्यांग महिला बनीं, और पाँच शिखरों पर भारत का झंडा फहरा चुकी हैं: एवरेस्ट, किलिमंजारो, एल्ब्रुस, कोसियुस्को और अकोंकागुआ।

  6. 2011–2017

    अंशु जामसेनपा: पाँच बार एवरेस्ट

    अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला की अंशु जामसेनपा पाँच बार एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला थीं — 2011 में दस दिनों में दो बार, फिर 2013 में, और मई 2017 में दोहरी चढ़ाई।

  7. 1959

    आरती साहा ने इंग्लिश चैनल तैरकर पार किया

    आरती साहा 1959 में इंग्लिश चैनल तैरकर पार करने वाली पहली भारतीय महिला — और पहली एशियाई महिला — बनीं। 1960 में वे पद्मश्री पाने वाली भारत की पहली महिला बनीं।

❄ अंटार्कटिका में भारत

1981 में बर्फ़ पर पहले भारतीय क़दमों से साल भर चलने वाले दो अनुसंधान केंद्रों और दक्षिणी ध्रुव तक की यात्रा तक।

  1. 1981

    अंटार्कटिका में पहले भारतीय क़दम

    भारतीय वैज्ञानिकों ने 1981 में अंटार्कटिका के जमे हुए महाद्वीप पर अपने पहले क़दम रखे। कार्यक्रम का पहला केंद्र दक्षिण गंगोत्री था, जहाँ भारतीयों ने पहली बार सर्दी बिताई।

  2. अदिति पंत

    समुद्र-विज्ञानी अदिति पंत अंटार्कटिका पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला थीं, और अभियान का हिस्सा होने के लिए उन्हें अंटार्कटिका पुरस्कार मिला।

  3. 1988

    मैत्री

    1988 में शिरमाखर ओएसिस का एक बर्फ़-रहित, चट्टानी क्षेत्र भारत के दूसरे अनुसंधान केंद्र मैत्री के लिए चुना गया — जो इस्पात के खंभों पर, तट से लगभग 100 किमी दूर बना है।

    ✓ NCPOR — Maitri ↗
  4. 21 नवंबर 2010

    दक्षिणी ध्रुव तक पहला भारतीय अभियान

    अंटार्कटिका में भारत की उपस्थिति के तीस वर्ष पूरे होने पर आठ सदस्यों का एक दल मैत्री से निकला, नौ दिनों में 2,300 किमी चला और 21 नवंबर 2010 को दक्षिणी ध्रुव पहुँचा।

  5. 18 मार्च 2012

    भारती

    मैत्री से लगभग 3,000 किमी पूर्व में भारत का सबसे नया अनुसंधान केंद्र भारती 18 मार्च 2012 को साल भर के अनुसंधान के लिए शुरू हुआ; इसके मुख्य भवन में 47 लोग रह सकते हैं।

    ✓ NCPOR — Bharati ↗
  6. 2015

    अंटार्कटिक जल में भक्ति शर्मा

    2015 में भक्ति शर्मा ने अंटार्कटिक महासागर में 41.14 मिनट में 2.28 किमी तैरकर विश्व कीर्तिमान बनाया — ऐसा करने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति और पहली एशियाई महिला।

🚀 अंतरिक्ष में

चंद्रमा पर पहले क़दम, अंतरिक्ष में पहला भारतीय, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के लिए भारत का मिशन, और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहला भारतीय।

  1. 1969

    चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री

    1969 में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरे।

  2. 1984

    राकेश शर्मा: अंतरिक्ष में पहले भारतीय

    विंग कमांडर राकेश शर्मा 1984 में सोवियत सोयुज़ टी-11 मिशन से अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने।

  3. 22 जुलाई 2019

    चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की ओर

    22 जुलाई 2019 को प्रक्षेपित चंद्रयान-2 चंद्रमा के अनछुए दक्षिणी ध्रुव की खोज के लिए एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर ले गया; यह 20 अगस्त 2019 को चंद्र कक्षा में पहुँचा।

    ✓ ISRO — Chandrayaan-2 ↗
  4. 26 जून 2025

    अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर शुभांशु शुक्ला

    भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, एक्सिओम-4 मिशन के पायलट, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुँचने वाले पहले भारतीय बने — और राकेश शर्मा के 41 वर्ष बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय।

✍ अभ्यास करें: खोजी और समुद्री यात्राएँ इस पृष्ठ से बने परीक्षा-शैली के प्रश्न और फ़्लैशकार्ड। ✍ क्विज़ दीजिए 🃏 फ़्लैशकार्ड 🌏 भारत और विश्व

हम कैसे जाँचते हैं: इतिहास के कार्ड एनसीईआरटी के अपने शब्दों पर आधारित हैं; एवरेस्ट हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान, दार्जिलिंग से; महिलाओं की ‘पहली’ उपलब्धियाँ पत्र सूचना कार्यालय से; अंटार्कटिका राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र से; अंतरिक्ष एनसीईआरटी, आकाशवाणी समाचार और इसरो से; बाली जात्रा इनक्रेडिबल इंडिया (पर्यटन मंत्रालय) से। पेज बनते समय हर वाक्यांश उसके स्रोत में खोजा जाता है।